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मध्यप्रदेश में काफी सालों से मामाराज है और मामाराज में ऐसी खबरें निकल कर आती ही रहती हैं जो चर्चा का विषय बन जाती है। मध्यप्रदेश में शिव’राज’ को 13 साल हो चुके हैं। 29 नवंबर 2005 को बाबूलाल गौर के स्थान पर शिवराज सिंह चौहान राज्य के मुख्यमंत्री बने थे और तब से अब तक मध्यप्रदेश की जनता पर मामा का जादू चला आ रहा है। अकेले शिवराज ने बखूबी कांग्रेस के दिग्गजों का न सिर्फ सामना किया बल्कि उनको धूल तक चटा दी। जैसे-जैसे समय बीतता गया विपक्ष गंभीर होता गया और तमाम मुद्दों को लेकर सरकार की घेराबंदी में जुट गया और सबसे बड़ा मुद्दा जो विपक्ष के लिए संजीवनी बना है वह है अपराध का मुद्दा।

तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदेश में अपराध पर लगाम नहीं लग सकी है, लेकिन मध्यप्रदेश में भले ही कानून व्यवस्था ठीक न हो लेकिन अपनी ईमेज चमकाने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने विज्ञापन के नाम पर दोनों हाथों से राज्य का खजाना लुटाते हुए खाली कर दिया। विज्ञापन के नाम पर शिवराज सिंह चौहान ने करोड़ों रूपये लुटाए हैं। रीजनल और नेशलन चैनलों को करोड़ों रुपये का ऐड दिया। करीब 250 वेबसाइटों को विज्ञापन दे दिया गया, जिसमें से ज्यादतर वेबसाइट्स का कोई अता-पता ही नहीं है। उसके बावजूद भी किसी को 10 लाख तो किसी को 20 लाख रूपए की खैरात बांट दी गई।

इस मामले ने कांग्रेस को एक मौका दे दिया है सरकार पर सवाल उठाने का। कांग्रेस की तरफ से विधायक जीतू पटवारी ने शिवराज सिंह चौहान सरकार पर अयोग्य मीडिया संस्थानों को बेहिसाब विज्ञापन देने का आरोप लगाया। पटवारी का कहना है कि सरकार ने केवल उन्हीं मीडिया संस्थानों को विज्ञापन दिए जो या तो भाजपाईयों द्वारा संचालित हैं या फिर शिवराज सिंह सरकार की चाटुकारिता करते हैं। सरकार अपने चहेतों को पैसे बांट रही है और अपनी किस्मत चमका रही है और जनता की गाड़ी कमाई विज्ञापनों में लुटाई जा रही हैं।

जो लिस्ट पेश की गई है उसमें कई चौकाने वाले तत्व सामने आए हैं। कई ऐसी वेबसाइट्स हैं जिन्हे मीडिया में काम करने वाले अपने पत्नी और बच्चों के नाम से चला रहे हैं। ऐसी वेबसाइट्स के लिए पैसे दिए गए जिसे किसी ने कभी खोलकर नहीं देखा। कुछ ऐसी वेबसाइट्स हैं जिसमें ये पता लगा है कि वो पार्टी से जुड़े लोगों की हैं, जो सिर्फ नाम के लिए है। यानि उन्हें साफ तौर पर रेबड़ी बांटी जा रही है।

विपक्षी कांग्रेस सवाल उठाए और सत्ता पक्ष शांत रहे ऐसा कैसे हो सकता है तो कांग्रेस के आरोपों से सरकार के मंत्री और विधायक नाराज हो गए और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी पर भड़क गए। मध्यप्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्रियों में शुमार संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार कर दिया और कांग्रेस के आरोपों को मीडिया के ऊपर प्रहार बता दिया। लेकिन हकीकत में यहां सवाल उठता है कि आखिर क्यों जनता के खून पसीने वाली कमाई को सरकार क्यों फर्जी वेबसाइट्स पर वह भी झूठे प्रचार में ज़ाया कर रही है। क्या सरकार को अपने काम पर भरोसा नहीं है इसलिए मीडिया से विशेष प्रेम रखा जा रहा है या फिर वाकई अपने मीडिया पर प्रचार के नाम पर सरकार में बैठ मंत्रियों और विधायकों के करीबियों पर सरकारी खजाना लुटाया जा रहा है।

यहां हकीकत में जनता की आवाज उठाने वाले मीडिया को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समझना होगा कि उनका दायित्व क्या है जनता की गाड़ी कमाई डकारना या जनता की पीड़ा को सरकार तक पहुंचाना। मीडिया की ताकत का कोई मुकाबला नहीं है। मीडिया की ताकत ने देशों के तख्ते पलट दिए है, अनेक आंदोलनों को उनके मुकाम तक पहुंचाया है। लेकिन जनता की कमाई पर नेताओं के साथ मिलकर डाका डालना मीडिया का काम नहीं है ।

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