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बीते 20 वर्षों की तुलना में सत्रहवीं लोकसभा के मौजूदा सत्र में सबसे ज्यादा कार्य हुआ है। मंगलवार तक लोकसभा में 128 प्रतिशत कामकाज दर्ज किया गया है। सरकार जारी सत्र में धड़ल्ले से हो रहे कामकाज से उत्साहित है। यही कारण भी है कि सरकार चालू सत्र को कुछ और दिनों के लिए बढ़ाना चाहती है।

पीआरएल लेजिस्लेटिव रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार तक निचले सदन में 128 प्रतिशत कामकाज हुआ है। इस  रिपोर्ट में कहा गया है कि 20 वर्षों के दौरान आहूत किसी भी सत्र के मुकाबले यह सबसे ज्यादा है। इसने करीब-करीब 125% प्रॉडक्टिवटी वाले 2016 के बजट सत्र और फिर 2014 के शीत सत्र को पीछे छोड़ दिया।

बता दें कि सदन में बृहस्पतिवार को शून्यकाल 4 घंटे 48 मिनट तक चला और इसमें 162 सदस्यों ने रात 10:50 बजे तक लोक महत्व के विभिन्न विषयों को उठाया।

वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र में बेहतर कामकाज के लिए बृहस्पतिवार को सदस्यों को बधाई भी दी। उन्होंने वित्त विधेयक पारित होने के बाद सदन में हुए कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि सदन में आम बजट पर 17 घंटे 23 मिनट की चर्चा हुई।

उन्होंने आग कहा कि अनुदान की मांगों के तहत रेल मंत्रालय के नियंत्राणाधीन अनुदान की मांगों पर 13 घंटे चर्चा हुई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नियंत्राणाधीन अनुदान की मांगों पर सात घंटे 44 मिनट चर्चा हुई।  ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्रालय के नियंत्राणाधीन अनुदान की मांगों पर 10 घंटे 36 मिनट चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि लोकसभा में निर्धारित समय से देर तक काम हो रहा है और दो मौकों पर तो विधायी कामकाज पूरा करने के लिए सदन की बैठक देर रात तक चली। राज्यसभा में बेहतर कामकाज हुआ है।

वहीं पीएम मोदी ने मंगलवार को सदन की निर्बाध कार्यवाही से उत्साहित होकर कहा कि जरूरत हो तो सत्र को कुछ दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है ताकि सारे काम निश्चित रूप से निपटा लिए जाएं।

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