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राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों के साथ संवाद के बाद कंपनी ने एक बयान जारी कर अपने कर्मचारियों के राजनीतिकरण पर खेद व्यक्त किया है। एचएएल ने इसे सनकपूर्ण और खेदजनक घटनाक्रम करार दिया है जो राष्ट्रीय सुरक्षा, संगठन और उसके कर्मचारियों के हितों के लिए खतरनाक साबित होगा। हालांकि, अपने बयान में एचएएल ने राहुल गांधी के संवाद का जिक्र नहीं किया है। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि राजग सरकार ने उसके प्रमुख स्थान को मान्यता देते हुए 2014 से 2018 की अवधि के दौरान करीब 27,340 करोड़ रुपये के आपूर्ति ऑर्डर देकर एचएएल को पूर्ण सहयोग दिया है।

अधिकारी ने कहा कि उत्पादन सुविधाएं बढ़ाने सहित अवसंरचना में सुधार एवं उन्नयन के लिए इस अवधि के दौरान 7,800 करोड़ रुपये तक का वित्तपोषण किया गया। अधिकारी ने कहा कि रक्षा एवं एयरोस्पेस उद्योग क्षेत्र में एचएएल को गौरव से देखा जाता है और उसने राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में अत्याधिक योगदान दिया है। एचएएल के अधिकारी ने अपने बयान में कहा, “कर्मचारियों के राजनीतिकरण का आज का प्रयास अफसोसजनक कदम है और यह संस्थान, उसके कर्मचारियों एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के हित के लिए नुकसानदेह होगा।”

बता दें, की पूर्व एवं वर्तमान कर्मचारियों से बातचीत में राहुल गांधी ने एचएएल को एयरोस्पेस के क्षेत्र में एक ‘‘सामरिक संपत्ति’’ बताते हुए मोदी सरकार पर इस सरकारी कंपनी को नष्ट करने का भी आरोप लगाया और उसके कर्मचारियों से कहा कि राफेल उनका अधिकार है। राहुल ने इस दौरान कहा था कि आपने 70 सालों तक काम किया लेकिन अगर कोई सोचे कि कोई आपके कब्र पर अपना भविष्य बनाएगा तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार के एक व्यक्ति ने कहा कि एचएएल के पास राफेल विमान बनाने की क्षमता नहीं है, मैं पूछना चाहता हूं कि जिनको कॉन्ट्रैक्ट मिला है, उनके पास क्या बनाने की क्षमता है। बीते 70 सालों में एचएएल ने सुखोई जैसे कई विमान बनाए लेकिन वे लोग कह रहे हैं कि एचएएल के पास क्षमता नहीं है।

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