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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने आज हड़ताल का ऐलान किया है। आइएमए के प्रांतीय महासचिव डॉ. डीडी चौधरी ने कहा कि देशभर में चिकित्सकों पर हिंसा के मामले बढ़े हैं इसलिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले ये सत्याग्रह की शुरुआत होगी।

इसी के चलते आज निजी अस्पतालों के चिकित्सक भी हड़ताल पर रहेंगे। इतना ही नहीं आज देश भर के लगभग 60 हजार डॉक्टर राजघाट पर धरना देने इकट्ठा हुए। राहत की बात यह है कि हड़ताल सिर्फ चार घंटे रहेगी और हड़ताल के दौरान इमरजेंसी मामलों में इलाज दिया जाएगा। दोपहर बाद स्वास्थ्य सेवाएं बहाल कर दी जाएंगी।

दरअसल एसोसिएशन का कहना है कि देशभर में डॉक्टरों पर हो रहे बेवजह हमले पीएनडीटी एक्ट समेत ऐसे 5 मुद्दे हैं जिन पर इनका विरोध है। इसी विरोध के चलते इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सत्याग्रह कर रहा है।

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने और उसमें डॉक्टरों के बजाय अन्य क्षेत्र के लोगों को प्रमुखता देने के निर्णय से भी डॉक्टरों में गुस्सा है। इसके अलावा डॉक्टरों के साथ मरीजों के द्वारा हिंसा करना या उनके मृत परिजनों के लिए मारपीट करना भी उनके इस गुस्से का एक महत्वपूर्ण कारण है।

इन नाराज डॉक्टरों की मांगों में यह कुछ प्रमुख मांग है। जैसे –

  • एमसीआइ में सुधार किया जाए न कि एमसीआइ को भंग कर नेशनल मेडिकल कमीशन थोपा जाए।
  • एमसीआइ में केवल मेडिकल प्रोफेशन के लोग रहें, बाहर के लोगों को शामिल न किया जाए।
  • चिकित्सकों व मेडिकल सेक्टर में हिंसा के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए।
  • डॉक्टरों, क्लीनिक, अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के लिए एकल विंडो व्यवस्था हो, लाइसेंस राज समाप्त किया जाए।
  • इलाज व जांच में लापरवाही के आरोप पर एफआइआर की बजाय सीएमएचओ या एमसीआइ में शिकायत।
  • केवल जेनेरिक दवाइयां लिखने की बाध्यता न हो।
  • एलोपैथिक दवा लिखने का अधिकार केवल एमबीबीएस डॉक्टरों के पास हो।
  • आवासीय क्षेत्र के क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटर, नर्सिग होम को लैंड सीलिंग से मुक्त किया जाए।

आपको बता दें कि इंडियन मेडिकल एशोसिएशन का दावा है कि 60 हजार ने लिखकर और 75 हजार डॉक्टरों ने ऑन लाइन सत्याग्रह का समर्थन किया है।

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