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तकरीबन 164 साल से चला आ रहा राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ये सिर्फ विवाद नहीं है इससे लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई हैं। आज 7 साल के बाद एक बार फिर सभी के दिल की धड़कने तेज हो चुकी हैं, जो कि बेसब्री से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रही हैं। इस केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 7 साल पहले फैसला सुनाया था।

7 साल पहले एचसी ने फैसले ने सुलगाई आग

30 दिसंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामलें में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, इस फैसले में विवादित क्षेत्र की दो तिहाई जमीन हिन्दुओं को और एक तिहाई जमीन मुस्लिम समुदाय के लोगों को देने का निर्णय लिया गया था। लेकिन ये फैसला दोनों ही समुदाय के लोगों को नामंजूर था। जिसके बाद ‘सुन्नी वक्फ बोर्ड’ ने 14 दिसंबर 2010 को एचसी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी। इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार 7 सालों से 20 पिटीशन्स पेंडिंग चल रही थी। लेकिन लगातार प्रयास के बाद इस साल 11 अगस्त को चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने पहली पिटीशन्स लिस्ट की थी।

एससी ने ‘सुन्नी वक्फ बोर्ड’ को लगाई फटकार

जब 11 अगस्त 2017 को 7 सालों के अथक प्रयासों के बाद एससी में पहली पिटीशन दाखिल की गई, तो डॉक्युमेंट्स के ट्रांसलेशन को लेकर एससी ने पहले दिन की सुनवाई को आगे के लिए टाल दिया था। बता दे कि एससी में इस मामलें से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और संस्कृत, पाली, फारसी, उर्दू और अरबी समेत करीब 7 भाषाओं में 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियों की पिटीशन दाखिल की गई थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए पिटीशन का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन करने के लिए 12 हफ्ते का वक्त दिया था।

2 बजे से एससी में सुनवाई शुरू

अब 12 हफ्तों के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर इस विवाद के पन्नों को खोला जाएगा। आज 7 साल बाद इस विवाद को लेकर एससी दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुनाएगा। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच आज दोपहर 2 बजे से सुनवाई शुरू करेगी।

शिया वक्फ बोर्ड सुनवाई टालने की फिराक में

हिन्दू समुदाय के लोग अब जल्द से जल्द इस मामलें का फैसला अपने हक में सुनना चाहते हैं लेकिन ऐसा लग रहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी इस मामले को फिलहाल टालने की फिराक में लगे हुए हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को टालने की अपील कर सकते हैं। इसके लिए दस्तावेज के ट्रांसलेशन का काम पूरा न होने को आधार बनाया जा सकता है। ऐसा अनुमान इसलिए भी लगाया जा रहा है क्योंकि शिया वक्फ बोर्ड ने समझौते के जरिए रामजन्मभूमि पर मंदिर बनाने का हलफनामा भी दाखिल कर दिया है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें को लेकर अपना रूख साफ़ करते हुए कह दिया है कि अब किसी भी हालत में ये सुनवाई नहीं टलेगी न आगे की कोई डेट दी जाएगी।

संगम के किनारे साधुओं की पूजा जारी

इस फैसले को लेकर सभी की सांसे अटकी हुई हैं दोनों पक्ष अपने हक में फैसला चाहते हैं। इस केस की सुनवाई आज दोपहर 2 बजे से एससी में शुरू होगी। इस मामलें का फैसला अपने पक्ष में पाने के लिए हिन्दू समुदाय के लोग इलाहाबाद में पूजा-अर्चना करने में जुट चुके हैं। इलाहाबाद के संगम किनारे साधू पूजा करके भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। यह पूजा सुनवाई चलने तक जारी रहेगी।

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