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सरकार मंगलवार को राज्यसभा में तीन तलाक बिल पेश करेगी। बीजेपी ने इसके लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया है।  लोकसभा से पहले ही तीन तलाक बिल पास हो चुका है लोकसभा से सरकार ने इस विधेयक को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के वॉकआउट के बावजूद आसानी से पास करा लिया था। 16वीं लोकसभा में भी सरकार ने मुस्लिम महिला विधेयक को निचले सदन से मंजूरी दिला दी थी, लेकिन राज्यसभा में यह गिर गया था।


बता दें कि राज्यसभा में विपक्ष अंकगणित के मामले में भारी है और बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीयू ने भी इस मसले पर उसके खिलाफ वोट देने की बात कही है। ऐसे में बीजेपी के लिए राज्यसभा से इस विधेयक को पारित कराना एक बार फिर से चुनौती होगा।

वहीं राज्यसभा में बहुमत न होने से कई बार बीजेपी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। जो बिल लोकसभा से आसानी से पास हो जा रहे हैं, वो राज्यसभा में अटक जा रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बीजेपी राज्यसभा में कितनी ताकतवर है। राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है।

बता दें कि राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 245 है, लेकिन अभी 4 सीटें खाली हैं। ऐसे में बहुमत हासिल करने के लिए 121 की संख्या की जरूरत है। वहीं अगर नंबर की बात करें तो एनडीए के पास अपने दम पर कुल 104 का आंकड़ा है। (भाजपा 78, जेडीयू 6, शिवसेना 3, अकाली दल 3, मनोनीत-निर्दलीय 12) इनमें से जेडीयू ने तीन तलाक बिल का विरोध करने की बात कही है। वहीं विपक्ष के पास भी 109 की संख्या है।

माना जा रहा है कि राज्यसभा में वाईएसआरसीपी के पास दो सांसद, जेडीयू के 6 सांसद और  एआईएडीएमके के 13 सांसद राज्यसभा में तीन तलाक पर  वोटिंग के दौरान हिस्सा नहीं लेंगे।

इस बीच विपक्ष को उम्मीद है कि वह इस बिल को रोक लेगी तो वहीं बीजेपी को भी अपने कुछ सहयोगीयों पर भरोसा है। क्योंकि RTI बिल और UAPA बिल के दौरान जिस तरह बीजद, TRS और वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार का समर्थन किया था, उससे राज्यसभा का पूरा गेम ही पलट गया था। राज्यसभा में BJD के पास 7, YSR के पास 2 और TRS के पास 6 सांसद हैं।

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