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उत्तर प्रदेश में जरायम की दुनिया एकबार फिर से पुलिसिया बंदूकों की गरज से दहल उठी है…बीते चौबीस घंटे में नोएडा में दो एनकाउंटर हुए…फेज 3 में एक लाख के इनामी बदमाश श्रवण को मार गिराया, उसके कब्जे से एके-47 मिली है…वहीं दादरी में पच्चीस हजार के इनामी बदमाश जितेन्दर को एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया गया…

गाजियाबाद में इनामिया सोनू उर्फ सुंदर ने घायल होने के बाद दम तोड़ दिया…यहीं के राजेन्द्र नगर एक्सटेंशन में हुई फायरिंग में कांस्टेबल सचिन को गोली लगी…जबकि एक अपराधी पकड़ा गया…सहारनपुर में इनामिया सलीम उर्फ अहसान पुलिस की गोली से ढेर हो गया…मुजफ्फरनगर में दरोगा को घायल करने वाले दो शातिर दबोचे गए…ये ताजातरीन पुलिसिया मुठभेड़ें हैं…योगी सरकार ताल ठोंककर अपराधियों के खिलाफ मुहिम को अपनी कामयाबी करार देती है…

एनकाउंटर पर सरकारी दावा

यूपी में अब तक 1160 एनकाउंटर

43 अपराधी ढेर

275 गंभीर तौर से जख्मी

2750 की हुई गिरफ्तारी

अपराधियों पर गोली दाग रही यूपी पुलिस को रैंबों का इंसाफ या सिंघम की दहाड़ तक की संज्ञा दी जा रही है…एनकाउंटर को लेकर यूपी पुलिस के लगाव को तस्दीक करना हो तो डीजीपी के पीआरओ के उस ट्वीट पर गौर करें, जिसे उन्होने लखनऊ में एक अपराधी सुशील को ढेर करने के बाद लिखा..“यूपी पुलिस एनकाउंटर एक्सप्रेस हाल्ट्स इन द कैपिटल….माइल्स टू गो”. यानि अपराधियों को मार गिराने का सिलसिला अभी जारी रहने वाला है…एपीएन द्वारा एनकाउंटर्स के इस ताबड़तोड़ अंदाज पर सवाल पूछे जाने पर आला अफसर दलील देते नहीं थकते…

ये बात दीगर है कि पुलिस की गरजती बंदूकों से अपराधियों में दहशत जरूर है…इसकी बानगी कैराना में दिख चुकी है जहां जेल से छूटे दो कुख्यात भाईयों ने पुलिस कप्तान को बाकायदा हलफनामा देकर भरोसा दिया कि वे अपराध से तौबा कर चुके हैं…यूं तो सार्वजनिक मंचों से मुख्यमंत्री खुद दोहरा चुके हैं कि, कोई उनकी पुलिस को ललकारेगा तो उसका जवाब गोलियों से दिया जाएगा…पर कुछ मामलों में पुलिसिया गोलियों की जद में बेगुनाहों के आने से सवाल भी उठ गए…विपक्ष को घेरने का मौका मिल गया, सदन में इस मुद्दे को उठाया गया…

आपराधिक मामलों के जानकार मानते हैं कि, जरायम पेशेवरों में मारे जाने से ज्यादा खौफ होता है  सजा का…बिहार इसका उदाहरण है जहां ट्रायल, मुकदमों पर ध्यान देकर त्वरित सुनवाई हुई और सजा दे दी गई जिससे प्रभावी तरीके से क्राईम कंट्रोल हुआ…योगी सरकार के अपराध पर रोकथाम के लिए उठाये गए एनकाउंटर्स के तरीके बेरहम हैं…और दूसरे कानूनी विकल्पों पर भी गौर करने की सख्त जरूरत है…

सत्ता की सरपरस्ती से यूपी में बीते कई सालों से अपराधियों-दबंगों का बोलबाला रहा है…योगी सरकार ने अपराधियों को लेकर जीरो टालरेंस का नारा दिया तो खाकी एक्शन में आ गई…क्राईम कंट्रोल के लिए लंबा रास्ता चुनने के बजाए एनकाउंटर का शार्टकट रास्ता अख्तियार कर लिया गया…अब जनता को ये तरीका भा रहा है…ऐसे में कई सवाल भी खड़े होते हैं…कि, क्या फ़र्ज़ी एनकाउंटर को अपराध के दायरे से बाहर निकाल दिया जाना चाहिए…क्योंकि अगर किसी अपराधी की मौत होती है तो जनता के अंदर ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है…हालांकि, ज़्यादातर हिस्सों में कई एनकाउंटर फ़र्ज़ी भी देखे गए हैं…लेकिन जनहित के नाम पर इन मुठेभेड़ों को करने का दावा करने वाले पुलिस ऑफ़िसर्स की छवि अपराध मुक्त समाज देने वाले में मददगारों की बन जाती है…या फिर इस संबंध में और क्या-क्या कानूनी उपाय किए जा सकते हैं…जिससे अपराधियों पर लगाम लग सके और उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई हो सके…

ब्यूरो रिपोर्ट एपीएन

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