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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पहले चरण के लिए 11 फरवरी को वोटिंग होनी है।   पहले चरण में 15 जिलों की 73 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे पहले चरण की  वीआइपी सीटों में मेरठ से लक्ष्मीकांत वाजपेयी की सपा के रफीक और बसपा के पंकज से टक्कर, नोएडा में सपा के सुनील चौधरी और बसपा के रविकांत मिश्रा हैं भाजपा के  पंकज सिंह की चुनौती, मथुरा में कांग्रेस के प्रदीप माथुर और बसपा के योगेश द्विवेदी हैं भाजपा के श्रीकांत शर्मा की अड़चन, भाजपा से संगीत सोम को सरधना में मिलेगी सपा के अतुल प्रधान और बसपा के मो. इमरान से टक्कर

इनमें से किस जिले की किस सीट पर कैसे बन-बिगड़ रहे हैं सियासी समीकरण,किस पार्टी से कौन है उम्मीदवार? कौन मारेगा बाजेगी? कौन चखेगा हार का स्वाद? 15जिलों की 73 सीटों का हाल-

एटा जिले की अलीगंज विधानसभा सीट सपा का अभेद किला मानी जाती है पार्टी ने यहां से पिछले पांच में से चार चुनाव जीते हैं 2007 में यहाँ से सपा से बसपा में शामिल हुए अवधपाल सिंह जीते थे  

एटा सीट से पिछले चार में से तीन बार सपा जीतने में सफल रही है 2007 में इस सीट पर सपा को हार मिली थी

जलेसर सीट बीजेपी और सपा के लिए खींचतान वाली रही है अंतिम के छह चुनावों में यहां से एक बार बीजेपी तो एक बार सपा विजयी रही है

एटा की मरहारा सीट सपा के खाते में है

कासगंज: कासगंज जिले में तीन विधानसभा सीटें कासगंज, पटियाली और अमनपुर हैं

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कासगंज से इस समय सपा के मनपाल सिंह विधायक हैं मनपाल 2002 में भी इस      सीट से चुनाव जीत चुके हैं हालांकि 2007 के चुनावों में ये सीट बीएसपी के खाते में चली गई थी

अमनपुर सीट अभी बहुजन समाज पार्टी के खाते में है

पटियाली सीट पर हुए पिछले चार चुनावों में से बीजेपी एक बार, बीएसपी दो बार, और सपा एक बार  जीती है.

फिरोजाबाद: फिरोजाबाद जिले में पांच विधानसभा सीटें हैं.

इनमें फिरोजाबाद, जसराना, शिकोहाबाद, सिरसागंज और टूंडला शामिल हैं.

फिरोजाबाद सीट से पिछले तीन चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को जनादेश मिला है 2002 में समाजवादी पार्टी 2007 में बीएसपी 2012 में बीजेपी के मनीष असीजा यहाँ जीते थे  

जसराना सीट समाजवादी पार्टी के पक्ष में जाति रही है यहाँ से  पिछले पांच में से चार चुनाव सपा ने जीते हैं

शिकोहाबाद सीट से 2002 में समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी लेकिन 2007 के चुनावों में स्वतंत्र उम्मीदवार अशोक यादव जीतने में सफल रहे थे 2012 में सपा ने बड़ी जीत हासिल की

सिरसागंज सीट सपा पर भी सपा जीती थी

टूंडला सीट से पिछले दो चुनावों में लगातार बीएसपी को जीत मिली है. जबकि 2002 में यहां से सपा उम्मीदवार विजयी रहे थे.

आगरा: आगरा जिले में नौ विधानसभा क्षेत्र आते हैं

इनमें आगरा कैंट, आगरा नॉर्थ, आगरा साउथ, आगरा रूरल, बाह, ऐत्मादपुर, फतेहपुर, फतेहाबाद और खेरागढ़ विधानसभा सीट शामिल हैं

आगरा कैंट से पिछले तीन चुनावों में लगातार बीएसपी के कैंडिडेट विजयी रहे हैं

जबकि आगरा नॉर्थ 2002 से से बीजेपी के कब्जे में हैं

आगरा रूरल सीट पर इस समय बहुजन समाज पार्टी का कब्जा है

आगरा साउथ को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है 2007 में ये सीट बीएसपी ने हथिया ली थी लेकिन 2012 में फिर से इस सीट पर बीजेपी का कब्जा हो गया

बाह से इस समय सपा से राजा महेंद्र अरिदमन सिंह विधायक हैं इस सीट पर राजा महेंद्र अरिदमन सिंह बीजेपी और जनता दल से भी विधायक रह चुके हैं यहां वोट पार्टी को कम और प्रत्याशी के नाम पर ज्यादा मिलता है

ऐत्मादपुर सीट पिछले 10 साल से बीएसपी के खाते में है और यहां से इस समय डॉक्टर धर्मपाल सिंह विधायक हैं

फतेहपुर सीट से पिछले तीन चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियों को जनादेश मिला है 2012 में यहां से सपा को जीत मिली थी लेकिन 2014 के उपचुनाव में ये सीट बीजेपी के विक्रम सिंह जीते थे

फतेहाबाद सीट पर बीएसपी के छोटेलाल वर्मा विधायक हैं वे 2002 में बीजेपी के टिकट पर भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं 2007 में छोटेलाल वर्मा सपा के टिकट पर लड़े और दूसरे नंबर पर रहे

खेरागढ़ सीट पिछले दो चुनावों से बीएसपी के कब्जे में है यहां से पार्टी के भगवान सिंह कुशवाहा विधायक हैं

हाथरस: हाथरस जिले में तीन विधानसभा सीटें हाथरस, सादाबाद और सिकंदरा राव हैं

हाथरस सीट बहुजन समाज पार्टी का गढ़ रही है पिछले चार चुनावों में यहां से बहुजन समाज पार्टी को ही जीत मिलती रही है जिसमें तीन वार रामवीर उपाध्याय विजयी रहे तो पिछली बार सीट के एससी घोषित हो जाने पर बसपा के ही गेंदा लाल चौधरी को जीत मिली थी

सादाबाद से 2012 के चुनावों में सपा के देवेंद्र अग्रवाल ने जीत हासिल की थी उनसे पहले लगातार तीन चुनावों में ये सीट आरएलडी के कब्जे में रही

सिकंदराराव सीट से इस समय बीएसपी के ही रामवीर उपाध्याय विधायक हैं जो हाथरस सीट के एससी घोषित हो जाने के बाद इस सीट पर आए थे उनसे पहले इस सीट पर यशपाल सिंह चौहान का दबदबा रहा है रामवीर दो बार बीजेपी से विधायक रहे हैं 2012 का चुनाव उन्होंने एसपी के टिकट पर लड़ा था और मामूली अंतर से हारे थे

mathuraमथुरा: मथुरा जिले में पांच विधानसभा सीट हैं

बलदेव एससी सीट से आरएलडी के पूरन प्रकाश विधायक हैं

छाता सीट भी पिछली बार आरएलडी के खाते में गई

मांट से आरएलडी अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के पुत्र जयंत चौधरी विधायक हैं

मथुरा सीट कांग्रेस का गढ़ कही जा सकती है पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर प्रदीप माथुर चुनाव जीतते रहे हैं

गोवर्धन विधानसभा जो पिछले चुनाव में ही सामान्य सीट घोषित की गई थी उसपर बसपा के राजकुमार रावत विजयी रहे हैं

अलीगढ़: अलीगढ़ सीट पर पिछले दो चुनावों से सपा के उम्मीदवार विजयी रहे हैं बीजेपी पिछले चार चुनावों से यहां दूसरे नंबर की पार्टी रहती आई है सपा के जफर आलम इस समय यहां से विधायक हैं

अतरौली विधानसभा सीट बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सीट मानी जाती है 2004 और 2007 के चुनावों में यहां से बीजेपी ने जीत दर्ज की थी  लेकिन पिछले चुनावों में ये सीट सपा के विरेश यादव ने जीत ली थी

बरौली लोकसभा सीट पर आरएलडी के दलवीर सिंह विधायक हैं. 2002 और 2007 के चुनावों में यहां से बसपा के ठाकुर जयवीर सिंह विजयी रहे थे

छर्रा सीट भी सपा के खाते में है और राकेश कुमार यहां से विधायक हैं

इगलास और खैर सीट पिछले दो चुनावों से आरएलडी के कब्जे में है इगलास से आरएलडी त्रिलोकी राम और खैर से आरएलडी भगवती प्रसाद विधायक हैं

कोली सीट पर 2002 और 2007 में बसपा से महेंद्र सिंह जीते थे, पिछले चुनाव में यहां से सपा के जमीर उल्लाह खान जीते

बुलंदशहर: बुलंदशहर में सात विधानसभा क्षेत्र हैं

अनूपशहर में पिछले दो चुनावों में बसपा के गजेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की है

बुलंदशहर में बसपा के ही मोहम्मद अलीम को जीत मिलती रही है

भाजपा नेता कल्याण सिंह की सीट रही देबई पर श्री भगवान शर्मा दो बार से चुनाव जीतते आए हैं 2007 में बीएसपी और 2012 में सपा से जीते थे  

खुर्जा सीट 2002 और 2007 में बसपा के अनिल कुमार ने जीती 2012 के चुनाव में कांग्रेस के बंशी सिंह पहाड़िया यहां ये विजयी रहे थे

शिकारपुर, सिकंदराबाद और सयाना सीट पर कोई पार्टी पूरे भरोसे के साथ दावा नहीं कर सकती क्योंकि इन सीटों पर पिछले तीन चुनावों में नतीजे अलग-अलग पार्टियों  के पक्ष में रहे हैं                           

shamliशामली: शामली में तीन विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें कैराना, थाना भवन और शामली शामिल हैं

कैराना में बीजेपी की तूती बोलती रही है 1996 से चार बार बीजेपी के टिकट पर हुकुम सिंह यहां से विधायक चुने जाते रहे हैं, हालांकि हुकुम सिंह के सांसद चुने जाने के बाद उपचुनाव में बीजेपी ने अनिल कुमार को उतारा था लेकिन क़रीबी मुकाबले में वह समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन से हार गए

शामली की सीट कांग्रेस के कब्जे में है यहां 2012 के चुनाव में यहां पार्टी की ओर से पंकज कुमार मलिक ने सपा के वीरेंद्र सिंह को नजदीकी मुकाबले में मात दी थी

थाना भवन सीट काफी समय से समाजवादी पार्टी के कब्जे में थी 2007 में यहां से आरएलडी को जीत मिली 2012 में बीजेपी ने इस सीट पर वापसी की यहाँ से बीजेपी के प्रत्याशी सुरेश कुमार ने आरएलडी के अशरफ अली खान को लगभग सौ वोटों से हरा दिया था

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर में सात विधानसभा क्षेत्र हैं

बुढ़ाना की सीट पर पिछले चार चुनावों में चार अलग-अलग पार्टी और प्रत्याशी विजयी रहे हैं यह सीट अभी सपा के कब्जे में है

चरथावल सीट पर बीएसपी पिछले तीन चुनावों से जीतती रही है

खतौली सीट पर बीएसपी और आरएलडी के बीच मुख्य टक्कर है

मीरापुर में पिछला चुनाव बसपा के जमील अहमद कासमी ने क़रीबी मुकाबले में आरएलडी उम्मीदवार को हराकर जीता था

मुजफ्फरनगर की सीट बीजेपी और सपा के बीच कांटे की टक्कर वाली रही है इस सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है

पुरकाजी पर पिछले चुनाव में बसपा के अनिल कुमार ने कांग्रेस के दीपक कुमार को हराया था

बागपत: बागपत विधानसभा सीट आरएलडी की सीट मानी जाती है लेकिन 2012 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की हेमलता चौधरी ने ये दबदबा तोड़ा था

बैरूत सीट पर भी अभी बसपा का ही कब्जा है इस सीट पर पिछले चुनाव में बसपा के लोकेश दीक्षित ने आरएलडी के अश्विनी कुमार को हराया था

छपरौली सीट आरएलडी का गढ़ रही है और पिछले तीन चुनावों से यहां आरएलडी जीत दर्ज करती आ रही है

मेरठ: मेरठ जिले में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं

पिछले पांच चुनावों के हस्तिनापुर सीट का इतिहास देखें तो किसी पार्टी को लगातार दो बार जीत नहीं मिली है इस समय इस सीट पर सपा के प्रभु दयाल बाल्मीकि विधायक हैं

किठौर सीट सपा का गढ़ बन गई है और पिछले तीन चुनाव से यहां से शाहिद मंजूर साइकिल के चुनाव चिन्ह पर जीत हासिल करते आए हैं बसपा यहां दूसरे नंबर पर रहती है

मेरठ से बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी विधायक हैं अंतिम छह में से चार चुनाव यहां बाजपेयी ने ही जीते हैं

मेरठ कैंट भी बीजेपी का गढ़ है यहां से लगातार छह बार बीजेपी ने जीत हासिल की है पिछले तीन चुनावों से यहां से सत्यप्रकाश अग्रवाल जीतते रहे हैं

मेरठ साउथ से भी पिछले चुनाव में बीजेपी के रवींद्र भड़ाना ने बसपा के हाजी राशिद अखलाक को हराया था

सरधना सीट पर 2007 में जरूर बीजेपी चूक गई थी लेकिन 1989 से हुए कुल सात चुनावों में से पांच बार यहां पर बीजेपी ने जीत हासिल की है. पार्टी के फायर ब्रांड नेता संगीत सोम यहीं से विधायक हैं

सिवलखास सीट से अलग-अलग पार्टियों के चुनाव जीतने का इतिहास रहा है

ghaziabadगाजियाबाद: दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं

साहिबाबाद सीट पर इस समय बसपा के अमरपाल शर्मा विधायक हैं 2012 के चुनाव में शर्मा ने बीजेपी के सुनील कुमार शर्मा को हराया था

मुरादनगर सीट पर पार्टी से ज्यादा राजपाल त्यागी का चेहरा ज्यादा हावी रहा है पिछले चुनाव में त्यागी को हार का सामना करना पड़ा था लेकिन वे इस सीट पर अलग-अलग पार्टियों से छह बार विधायक रहे हैं

मोदीनगर से आरएलडी के सुदेश शर्मा विधायक हैं पहले इस सीट पर ज्यादातर बीजेपी का कब्जा रहा है

लोनी सीट से बहुजन समाज पार्टी के जाकिर अली विधायक हैं जाकिर अली ने  पिछले चुनाव में आरएलडी के मदन भैया को पराजित किया था

गाजियाबाद सीट कभी बीजेपी का गढ़ मानी जाती थी लेकिन पिछले चार चुनावों से चार अलग-अलग पार्टियों को यहां जीत मिली है

गौतमबुद्ध नगर:  गौतमबुद्धनगर में तीन विधानसभा क्षेत्र दादरी, नोएडा और जेवर आते हैं

दादरी में पिछले दो चुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी और बीएसपी में रहा है जिसमें बीएसपी के सतवीर सिंह गुर्जर जीतते रहे हैं

जेवर में पिछले तीन चुनावों से बीएसपी जीतती रही है फिलहाल यहां से पार्टी के वेदराम भाटी विधायक हैं

नोएडा सीट बीजेपी के खाते में है

2012 में महेश कुमार शर्मा यहां से विधायक चुने गए थे उनके सांसद चुने जाने के बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी की ही विमला बाथम शर्मा विजयी रहीं

हापुड़: हापुड़ जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र धौलाना, गढ़मुक्तेश्वर और हापुड़(एससी) सीटें हैं

धौलाना से सपा के धर्मेश सिंह तोमर विधायक हैं

गढ़मुक्तेश्वर से पिछले तीन चुनावों में सपा के मदन चौहान जीतते रहे हैं

हापुड़ एससी सीट से 2002 और 2007 में बीएसपी के धर्मपाल विजयी रहे थे लेकिन पिछले चुनावों में ये सीट कांग्रेस के खाते में चली गई थी

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