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क्या उत्तराखंड में सरकारें हाईकोर्ट के फैसलों और निर्देशों से ही नियम-कानून को लेकर जागती है। ये सवाल इसलिए क्योंकि, हाल के दिनों में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने त्रिवेंद्र सरकार को कई निर्देश दिए हैं। किसी में उसे सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है तो कई मामले में हाईकोर्ट के फैसले को सरकार जमीन पर उतारती दिखी। वहीं टिहरी झील में रिवर राफ्टिंग पर रोक के बाद हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ इसकी अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने टिहरी झील में वाटर स्पोर्ट्स और ऋषिकेश में गंगा नदी में रिवर राफ्टिंग की अनुमति कहा कि इनका संचालन नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। क्योंकि पूर्व में कोर्ट ने राज्य में नीति न होने के कारण साहसिक खेलों पर रोक लगा दी थी।

वहीं कुछ दिनों पहले राजधानी देहरादून के कूड़े के ढेर पर बैठे होने को लेकर सख्त नाराजगी जताते हुए कड़े निर्देश दिए थे। अब एक बार फिर हाई कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को नया निर्देश दिया है। जो मानव रक्षा से ही जुड़ा है। कोर्ट को सभी सरकारी अस्पतालों के आपातकालीन, ओपीडी और पर्चा बनाने वाले कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिये हैं। कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के खाली पदों की भी पूरी जानकारी तलब की है।

मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज में तीन हफ्ते में नौ बच्चों की मौत हो गई और बच्चों की मौत चिकित्सकों के अभाव में हुई। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि खाली पदों को भरने के लिए क्या कोशिशें की जा रही हैं। हाई कोर्ट के इस निर्देश पर कांग्रेस को मौका हाथ लग गया है। वह प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े कर रही है। कांग्रेस को लगता है कि, मानो प्रदेश सरकार हाईकोर्ट से चल रही है।

कांग्रेस भले ही त्रिवेंद्र सरकार पर हमलावर हो। लेकिन कांग्रेस के राज में भी हाई कोर्ट को कई मौकों पर निर्देश देने पड़े हैं। फिलहाल सत्ता में बीजेपी की सरकार है तो सरकार का बचाव करना पार्टी का धर्म तो लगता ही है।

देहरादून में कूड़े के लगे अंबार को हटाने के लिये भी जनहित याचिका दायर की गई है। जिसे लेकर हाई कोर्ट ने निगम प्रशासन को निर्देश दिए थे। वहीं अस्पतालों के मामले में भी हल्द्वानी निवासी नरेश मैंदोला की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति बी के बिष्ट और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने सरकार से उक्त बिंदुओं पर दो सप्ताह में शपथ पत्र पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

                                                 – एपीएन, ब्यूरो रिपोर्ट

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