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पुलिस सुरक्षा का शौक पालने वाले कथित 38 वीआईपी लोगों ने मुंबई पुलिस को 5 करोड़ 11 लाख रुपये से ज्यादा रुपयों की भरपाई नहीं की है। वर्ष 2000 से 2018 तक मुम्बई पुलिस को पुलिस सुरक्षा लेने वाले 38 लोगों ने भुगतान नहीं किया है। इसका खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता नागमणि पाण्डे द्वारा मांगी गई सूचना के अधिकार के तहत हुआ है।

ये कारस्तानी मुम्बई में रहने वाले कुछ धनपशुओं की हैं…जो अपने साथ पुलिस का बंदूकधारी बॉडी गार्ड लेकर चलने का शौक तो पालते हैं लेकिन उसका बताया चुकाने के वक्त बंगले झांकने लगते हैं। इन 38 लोगों ने मुंबई पुलिस की सुरक्षा तो ले ली…लेकिन मुम्बई पुलिस के कमिश्नर दफ्तर में इसका शुल्क 18 साल से नहीं चुका रहे हैं…फिर भी उनकी सुरक्षा में लगे पुलिस बल को हटाया नहीं गया है…ऐसे में सवाल सूबे की बीजेपी-शिवसेना सरकार के साथ ही पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर भी उठ रहे हैं…क्योंकि मामला एक-दो साल नहीं 18 साल पुराना है।

ऐसे में महाराष्ठ्र की देवेंद्र फडनवीस सरकार पर सवाल उठने लाजिमी हैं कि आखिर सूबे के गृह विभाग को इसकी कोई फिक्र क्यों नहीं हैं…क्योंकि इसी महाराष्ट्र में किसान चंद रुपयों के कर्ज में डूबने और सूदखोरों से परेशान होकर मौत तक को गले लगाते रहे हैं…लेकिन कथित रसूखदारों द्वारा अपनी जान की हिफाजत के बदले 18 साल से मुंबई पुलिस को उसके बंदूकधारी गार्डों के बदले कोई भुगतान नहीं किया गया है…

सवाल मुंबई पुलिस पर भी उठ रहे हैं कि, उसने पुलिस सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों का 18 साल से वेतन भुगतान नहीं किये जाने के बावजूद उन धनपशुओं की पुलिस सुरक्षा क्यों नही हटाई है…क्या इसके पीछे कोई सरकारी दबाव है जिसने मुंबई पुलिस को अपना मुंह बंद रखने पर मजबूर कर दिया है…

कई लोगों के लिए दिखावा बड़ी चीज है…आज के समय में खुद को बड़ा दिखाने की चाहत हर किसी में है…खुद के साथ बंदूकधारी सुरक्षाकर्मी लेकर चलने का शौक नेता, अभिनेता, धन पशुओं से लेकर सफेदपोशों और रसूखदारों तक को है…इससे उनकी शान में शायद चार चांद लगते हैं…लेकिन यही लोग जब पुलिस के बॉडीगार्ड का वेतन पुलिस विभाग को न दें तो और फिर भी 18 साल बाद उन्हें सुरक्षा मिलती रहे तो क्या होगा…क्या होगा…कुछ ऐसा ही हुआ है महाराष्ट्र में…आईये देखते हैं…

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