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एनआरसी पर असम से उठे सियासी बवंडर के बाद देश के दूसरे हिस्सों में भी अवैध बांग्लादेशियों घुसपैठियों को बाहर का रास्ता दिखाने की आवाजें उठने लगी है। देवभूमि हरिद्वार में अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी के पकड़े जाने के बाद घुसपैठियों के खिलाफ यहां भी आवाज मुखर होने लगी है। स्थानीय सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जिलाधिकारी से हरिद्वार में रह रहे बांग्लादेशियों का सर्वे कराने को कहा है।

बांग्लादेशियों को लेकर तरह तरह की आशंकाएं भी जताई जाने लगी है। हरिद्वार के पिरान कलियर क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक के पकड़ने जाने के बाद घुसपैठियों को लेकर यहां भी सियासत गरमाने लगी है। मुस्लिम बहुल पिरान कलियर क्षेत्र में बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों के रहने की आशंका जताते हुए उन्हें देश से बाहर भेजने की मांग मुखर होने लगी है।

हरिद्वार से बीजेपी सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने जिलाधिकारी को गंगा किनारे अवैध बस्ती बनाकर रहने वाले लोगों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। निशंक का साफ कहना है कि बांग्लादेशियों के लिए उत्तराखंड में कोई जगह नहीं है। वो इस मसले पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात करने की बात भी कर रहे हैं। वहीं हरिद्वार के लक्सर से बीजेपी विधायक संजय गुप्ता ने भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बांग्लादेशियों के रहने पर चिंता जताई है। उनका तो ये भी कहना है कि कूड़ा बिनने और पन्नी चुगने जैसे कार्यों की आड़ में बांग्लादेशी घुसपैठिए आतंकी गतिविधियों में भी शामिल होते हैं। उन्होंने इन लोगों की खुफिया जांच कराने की भी मांग की है।

दरअसल, असम में जब से एनआरसी में 40 लाख लोगों को अवैध घोषित किया गया है। तब से पूरे देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर सियासत गरमाई हुई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जहां खुलकर बांग्लादेशी घुसपैठियों का पक्ष लिया है। वहीं दूसरे दल परोक्ष रूप से एनआरसी का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या देश के विभिन्न हिस्सों में फैल चुके अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या मुस्लमानों के खिलाफ देश से निकालने की कार्रवाई शुरू हो पाएगी?

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