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यूपी के बुलंदशहर में एनएच 91 पर हुए गैंगरेप ने सृष्टि बख्शी को इस कदर परेशान किया कि वो महिलाओं के हक की खातिर घर से निकल पड़ी… भारत में महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति के बारे में जागरूकता पैदा करने के मिशन को लेकर सृष्टि बख्शी कन्याकुमारी से कश्मीर तक पदयात्रा पर निकली हुई हैं… 11 राज्य, 3800 किलोमीटर और 260 दिन का लक्ष्य …इस कठिन रास्ते में सृष्टि अकेले ही निकली लेकिन रास्ते में कारवां बढ़ता गया…आज सृष्टि के साथ पूरा देश है…

सृष्टि के पास एमबीए की डिग्री है और बेहतरीन नौकरी भी… वे अपने पति के साथ हांगकांग में रहती हैं… लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में साल 2016 में हुई  गैंगरेप ने उनके दिलोदिमाग को झकझोर कर रख दिया , दिल को दहला देने वाली इस घटना ने उनके मन पर ऐसा असर डाला कि उन्होंने अपनी हाई प्रोफाइल नौकरी छोड़कर ‘क्रासबो’ नामक आंदोलन शुरू किया, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और भारत को महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान बनाना है।

सृष्टि ने पिछले साल 15 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से अपनी पदयात्रा शुरू की और अब तक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली को पैदल पार कर चुकी हैं

दिल्ली में सृष्टि बक्शी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले इंडिया गेट पर राष्ट्रीय महिला आयोग की भागीदारी में 4 मार्च को एक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें हजारों महिला और पुरुषों ने शामिल होकर नाइट वॉक किया… रात के वक्त आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कि रात को महिलाएं भी इसी तरह धूम सके जिस तरह पुरूष घूमते है…

महिला सशक्तिकरण की इस मुहिम में सृष्टि बख्शी रोजाना 25 से 30 किलोमीटर पैदल चलती हैं…  और रोजाना 100 से ज्यादा लोगों से मिलती हैं,  उनसे बात करती है, उनके साथ महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा करती है, महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की कोशिश करती है… और किसी समाधान पर पहुंचने की कोशिश करती है…

पदयात्रा के दौरान सृष्टि कई स्कूलों और संस्थाओं में वर्कशॉप भी आयोजित कर रही हैं जिसमें वो महिलाओं को उनके हक के लिए आवाज उठाने के लिए प्रेरित कर रही है और समाज को भी समझाने की कोशिश कर रही हैं कि जब तक नारी को उनका हक और सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक हम एक सभ्य और सशक्त समाज की रचना नहीं कर सकते… सृष्टि बख्शी की  ये वर्कशॉप केवल महिलाओं के लिए नहीं हैं, बल्कि पुरुषों और युवा लड़कों के लिए भी है… सृष्टि का मानना है कि पुरूषों के लिए महिलाओं के सशक्तीकरण में विश्वास करना भी उतना ही जरूरी है

सृष्टि को इस बात पर बेहद शर्म महसूस होती है कि भारत महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान नहीं माना जाता है… विदेश में रहने के दौरान जब भारत में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को बारे में बात होती थी तो सृष्टि का सिर शर्म से झुक जाता था लेकिन उसी वक्त सृष्टि ने ठाना कि अब हालात बदलना होगा… और वो भारत लौट कर महिलाओं के लिए संघर्ष करने में जुट गई

हालांकि सृष्टि को सामाजिक कार्यो का कोई अनुभव नहीं था लेकिन मन में महिलाओं की सशक्तिकरण की तड़प थी… ऐसे में दृढ़ निश्चय कर सृष्टि वापस भारत लौटी और अपनी योजनाओं के बारे में अपने परिवार से बात की… आर्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने वाली सृष्टि के विचार का पति और परिवारवालों ने पूरा समर्थन किया…

सृष्टि महिलाओं के लिए काम तो करना चाहती थी लेकिन सब कुछ इतना आसान नहीं था…नारी के हक की लड़ाई के लिए उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर के लिए पद यात्रा का निश्चय किया तो इसके लिए सृष्टि को पूरे साल इसकी तैयारी करनी पड़ी… पदयात्रा के लिए उन्होने कठिन शारीरिक प्रशिक्षण लिया और इस मिशन के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार किया…

सृष्टि ने नारी सशक्तिकरण के लिए लड़ाई लड़ने के लिए काफी शोध किया और कई लोगों से बात की, जिनका सामाजिक कार्य के क्षेत्र में कई सालों का अनुभव था… अपने इस यात्रा के दौरान सृष्टि को महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक संकट की कठोर वास्तविकताओं और सच्चाइयों से गहरे रूप से जुड़ने का मिला है…घरेलू हिंसा, शराब की खुली खपत, पुलिस बल की कमी और पीड़ित महिलाओं के प्रति सहानुभूति की कमी जैसी कुछ क्रूर सच्चाइयां हैं, जिसका उन्होंने अभी तक सामना किया है…

सृष्टि बख्शी का मिशन जारी है और वो अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रही हैं… सृष्टि के मिशन को देश का समर्थन मिल रहा है और नारी सशक्तिकरण के दिशा में पूरे देश में एक नई बहस छिड़ गई है

-एपीएन ब्यूरो

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