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आखिरकार देश के तीन बड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कलम चला दी और जनता के भविष्य को राह दिखाई। तीनों मामलों में जहां एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को फैसला सुनाने का हक दिया तो वहीं बाकी दो मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने जनता को ध्यान में रखते हुए अपनी बात रखी। सुबह 10 बजे जब सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ बैठी तो एससी-एसटी प्रमोशन मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर राज्य सरकारें चाहें तो वे प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं। हालांकि शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की यह अर्जी खारिज कर दी कि एससी-एसटी को आरक्षण दिए जाने में उनकी कुल आबादी पर विचार किया जाए। कोर्ट ने प्रमोशन मामले में राज्य सरकारों को यह हक दिया कि वो निश्चित करें कि उन्हें अपने राज्य में प्रमोशन पर आरक्षण देना है कि नहीं।

वहीं आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला काफी नपा-तुला आया। उनके फैसले में जनता का लाभ देखा गया। उच्चतम न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी है लेकिन बैंक खाता खोलने, मोबाइल सिम लेने तथा स्कूलों में नामांकन के लिए इसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए के सिकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की संविधान पीठ ने बुधवार को बहुमत के फैसले में आधार कानून को वैध ठहराया लेकिन इसके कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति सिकरी ने अपनी, मुख्य न्यायाधीश तथा न्यायमूर्ति खानविलकर की ओर से बहुमत का फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि निजी कंपनियां आधार डाटा की मांग नहीं कर सकतीं। इसके साथ ही न्यायालय ने डाटा सुरक्षा को लेकर मजबूत प्रणाली विकसित करने की सरकार को हिदायत दी। न्यायालय ने बैंक खाता खुलवाने, मोबाइल कनेक्शन हासिल करने और स्कूलों में नामांकन के लिए आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी लेकिन पैन कार्ड के वास्ते इसकी अनिवार्यता बरकरार रखी है। न्यायालय ने कहा कि निजी कंपनियां आधार नहीं मांग सकतीं। न्यायालय ने स्कूलों में नामांकन के लिए आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी है लेकिन केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई), राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के लिए यह जरूरी होगा।

इसके साथ ही तीसरा मामला सुप्रीम कोर्ट के लाइव स्ट्रीमिंग पर थी।  सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में मुख्य केसों की लाइव स्ट्रीमिंग पर हामी भर दी। खंडपीठ ने कहा कि इसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से ही होगी। इससे न्यायपालिका की पारदर्शिता और सच्चाई को बढ़ावा मिलेगा।

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