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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आतंकवाद के खिलाफ बड़ा फैसला लिया। केंद्र सरकार ने जम्‍मू-कश्‍मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक के संगठन जम्‍मू-कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया।

केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने बताया कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधी अधिनियम 1967 के तहत जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट को गैरकानूनी असोसिएशन घोषित किया है। यह कदम सरकार के द्वारा आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत उठाया गया।

गृह सचिव ने आगे कहा कि यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ने घाटी में अलगाववादी विचारधारा को हवा दी और यह 1988 से हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों में सबसे आगे रहा है। राजीव गौबा ने बताया कि जम्मू और कश्मीर पुलिस के द्वारा JKLF के खिलाफ 37 एफआईआर दर्ज की गई हैं। सीबीआई ने भी दो केस दर्ज किए जिसमें से एक IAF जवान की हत्या का मामला भी शामिल है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी एक केस दर्ज किया है, जिसकी जांच जारी है।

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में अलगाववादी नेताओं को स्टेट के द्वारा सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। इसकी समीक्षा करने के बाद ऐसे कई लोगों की सिक्यॉरिटी वापस ले ली गई और समीक्षा की यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

बता दें कि जेकेएलएफ पर आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगता रहा है। यासीन मलिक पर आरोप है कि 1994 से भारत विरोधी गति‍विधियां चलाते थे। वह देश के पासपोर्ट पर पाकिस्‍तान जाते और वहां पर देश विरोधी गतिविधि‍यों में लिप्‍त रहते थे। पिछले दिनों पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार ने यासीन मलिक समेत सभी अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली थी। अब एक बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने जेकेएलएफ को बैन कर दिया है।

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