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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम वायदे करती हो लेकिन अस्पतालों में प्राथमिक सुविधाओं की कमी इन सभी दावों की पोल खोल रही है। मुरादाबाद का सबसे बड़ा पंडित दीन दयाल उपाध्याय संयुक्त जिला अस्पताल की हालत बद से बदत्तर है। इस अस्पताल में पूरे मंडल से करीब बारह सौ रोगी रोजाना अपना इलाज कराने आते हैं।

मुरादाबाद के पंडित दीन दयाल उपाध्याय संयुक्त जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं दुरुस्त होनी चाहिए, लेकिन लोगों का आरोप है कि यहां की केवल बिल्डिंग बड़ी है, व्यवस्थाएं नहीं। इस अस्पताल में समस्याओं का अंबार लगा है और मरीजों की परेशानी सुनने वाला यहां कोई नहीं है।

जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा का सच जानने के लिए हम अस्पताल के अंदर दाखिल हुए। जब हम अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड पहुंचे तो यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की बदरंग तस्वीर देखने को मिली। गंदगी के बीच एक मरीज बेड पर लेटा हुआ था। मरीज की स्थिति ठीक नहीं थी और उसे बेड पर ही टॉयलेट हो रहा था। जो फैल कर जमीन पर पसरा हुआ था। इसी गंदगी और बदबू के बीच लाचार मरीज लेटने को मजबूर था, लेकिन उसे देखने वाला कोई नहीं था।

मुरादाबाद के जिला अस्पताल में डॉक्टरों की बड़ी कमी है। आपको जानकर हैरत होगी कि जिला अस्पताल में 45 डॉक्टर के नियुक्ति का प्रावधान है लेकिन यहां महज 27 डॉक्टर ही नियुक्त किए गए है। डॉक्टरों की कमी की वजह से यहां इलाज बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। अस्पताल में महज 27 डॉक्टरों का होना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का पोल खोलने के लिए काफी है। डॉक्टरों की कमी का खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को उठाना पड़ता है।

अव्यवस्था का हाल ये है कि मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ता है। अस्पताल में हर वक्त दवा की किल्लत बनी रहती है। यही वजह है कि मरीजों को ज्यादातर दवाईयां अस्पताल के बाहर चल रहे निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती है।आरोप तो ये भी लगता है कि कमीशन के चक्कर में डॉक्टर वैसी दवाओं को लिख देते हैं जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।

जिला अस्पातल ही हालत ये है कि यहां पीने का पानी तक मयसर नहीं है।

पिछले कई दिनों से यहां ज्यादातर प्याऊ खराब पड़े हैं।  मरीज और उनके ‌तीमारदार पीने के पानी को तरस रहे हैं। इमरजेंसी के बाहर लगा हैंडपंप भी खराब पड़ा है।मरीजों के लिए तीमारदारों को पीने का पानी बाहर से खरीदकर लाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं शौचालयों में भी पानी नहीं आ रहा है। सभी वाटरकूलर या तो खराब हैं, या फिर उन्हें चलाया ही नहीं जा रहा है।

वहीं जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। आए दिन अस्पताल में चोरी होती रहती है। बीमारी से बेसुध मरीज और परेशान परिजन चोरों के निशाने पर रहते हैं।

जब हमने जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा के बारे में यहां के सीएमएस से बात की तो उन्होंने डॉक्टरों की कमी की बात तो मानी लेकिन साथ ही उन्होंने अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं का गुणगान करना शुरू कर दिया लेकिन भूल गए कि सिर्फ आधुनिक मशीन और सुविधा होना ही काफी नहीं है बल्कि उन सुविधाओं का मरीजों तक भी पहुंचना जरूरी है ताकि उनका मरीजों को लाभ मिल सके।

                                                                                                                ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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