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जब देश की रक्षा करने वाले जवान ही पीछे हटने लगें तो, इससे बड़ी हैरानी वाली बात नहीं हो सकती। ऐसा खुलासा हुआ है कि लोग बार्डर सिक्युरिटी फोर्स (बीएसएफ) में जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों से ऐसे हालात बनने लगे हैं। 2014 में बीएसएफ में 31 लोगों का चयन हुया था। लेकिन साल 2016 में सिर्फ 17 जवान ही बीएसएफ में शामिल हुए। वहीं, 2013 में 110 लोगों का चयन हुआ जिसमें 69 जवान शामिल हुए। लेकिन प्रशिक्षण के दौरान 15 जवान छोड़कर चले गए। 2015 में हुई यूपीएससी की परीक्षा में 28 में से 16 लोगों ने बीएसएफ में जाने से इंकार कर दिया।

बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद के लिए चयनित 57% लोगों ने नौकरी करने से मना कर दिया है। ऐसा भी हो सकता है कि भविष्य में ये लोग किसी भी अर्धसैनिक बल की परीक्षा में न शामिल हो पाएं। इसके बावजूद उन्होंने इनकार कर दिया। इन लोगों ने ज्वाइन न करने की वजह भारतपाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव और बीएसएफ जवान तेज बहादुर द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो को वजह बताया है।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के लिए कुल 5,309 पोस्ट हैं जिनमें से 522 खाली हैं। बीएसफ के एक सीनियर अफसर ने कहा कि बीएसएफ, सीआरपीएफ और आईटीबीपी में कठिनाई वाली जगहों पर पोस्टिंग होती है। इसलिए लोग इनमें शामिल नहीं होना चाहते है। जो लोग इस नौकरी के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं, उन्हें आना नहीं चाहिए।

बीएसएफ की नौकरी ज्वाइन न करने वाले विवेक मिन्ज ने कहा, ‘बीएसएफ उनकी पहली पसंद नहीं है। अगर सीआईएसएफ में चुने जाते तो ज्वाइन कर लेते। मेरा टारगेट आईएएस बनना है। सीआईएसएफ में पोस्टिंग शहरों में रहेगी। इससे आगे की पढ़ाई करने में आसानी होगी।’

वहीं, लोगों का कहना है कि बीएसएफ में प्रमोशन में रोड़े बहुत होते हैं। नौकरी छोड़ने वाले पंजाब के एक शख्स ने कहा कि लोगों की नजरों में आर्मी की इज्जत बीएसएफ के जवान से ज्यादा होती है। दूसरे ने कहा कि लड़का खोज रहे परिवार की पहली पसंद भी आर्मी वाला होता है, बीएसएफ का जवान नहीं।

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