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चुनावी मौसम में शीला दीक्षित ने एक साक्षात्कार में कहा कि राहुल गांधी परिपक्व नहीं है उनको थोड़ा समय और देना चाहिए। तो बात यह है कि क्या कांग्रेस नेता द्वारा कही गई ये बात उनके नेतृत्व पर सवाल उठाती है या इस बात के पीछे उनका मतलब कुछ और ही था? ऐसे चुनावी दौर में नेताओं द्वारा गई कही हर बात एक मुद्दा बन जाती है। किस बात का असर चुनाव पर हो जाए ये कहना मुश्किल हो जाता है। जैसे बीजेपी को शिवसेना से गठबंधन टूटने के बावजूद भी भारी मात्रा में सीटें प्राप्त हुई। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या मुंबई में हुई इस जीत का असर यूपी चुनाव पर होगा या नहीं? दोनों ही आज के खास मुद्दे हैं जो ट्रेंड में हैं।

24 फरवरी को एपीएन स्टूडियो में इन दोनों ट्रेन्डिंग मुद्दों पर बात की गई। मुद्दे के दो पड़ाव थे जिनमें पहले ये जानने की कोशिश की गई कि नेता, शीला दीक्षित की बात को किस संदर्भ में लेते हैं और दूसरे पड़ाव में मुंबई में हुए चुनाव का कितना असर यूपी पर होगा, मुद्दे पर बातचीत हुई। मुद्दे का संचालन एंकर अनन्त त्यागी ने किया वहीं सुरेंद्र राजपूत (प्रवक्ता,यूपी कांग्रेस), नरेंद्र सिंह राणा (प्रवक्ता, यूपी बीजेपी), अनिल यादव (प्रवक्ता, सपा), और गोविंद पंत राजू (सलाहकार सम्पादक, एपीएन) मेहमानों के तौर पर मौजूद थे।

सुरेंद्र राजपूत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शीला दीक्षित के बयान को इस तरह लपेटना बाल की खाल निकालने की तरह है। परिपक्वता तो एक ऑन गोइंग प्रॉसेस है, मोदी भी प्रधानमंत्री के रुप में अभी परिपक्व हो रहे हैं,  वह जो भी बयान देते हैं वो सबके सामने हैं। अमेठी की जनता ने राहुल गांधी को 4 बार अपना सांसद चुना है, तो उनको अपरिपक्व बोलना जनता का अपमान है। हम कांग्रेस के नेता, राहुल गांधी जो कि हमारे लीडर हैं उनकी लीडरशीप में काम करना गर्व की अनुभूति कराता है। बीएमसी चुनाव पर उनका कहना था कि बीएमसी चुनाव स्थानीय मुद्दों पर होते है जबकि यूपी में राष्ट्र मुद्दों को भी उठाया जाता है तो एक जगह जीत का मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि यूपी में भी जीत होगी।

गोविंद पंत राजू ने कहा कि अगर कांग्रेस में लोकतांत्रिक चिंतन बाकि होता तो वो इस पर गंभीरता से बात करते और राहुल गांधी ने अपरिपक्व होने की निशानी तो तब ही दे दी जब गठबंधन के बाद ज्वाइंट प्रैस कान्फ्रैस हुई थी और राहुल ने बीएसपी की नेता मायावती की तारीफ की थी उस समय अखिलेश यादव के चेहरे का रंग देखने लायक था और उन्होंने राहुल के भाषण पर सफाई भी दी थी। और बीएमसी चुनाव का सकारात्मक प्रभाव बताते हुए गोविंद जी ने कहा कि इसका असर पड़ता है, जनता की मानसिकता बदलती है। जीती हुई पार्टी के नेताओं का मनोबल बढ़ जाता है वो आत्मविश्वासी होकर अपनी बात को रख पाते हैं। जिसका असर जनता पर पॉजिटिव तरीके से पड़ता है।

अनिल यादव ने सुरेंद्र राजपूत की बातों को सही ठहराते हुए कहा कि शीला जी के बयान को तोड़ मरोड़ कर बताया जा रहा है। उनकी बात के मायने गलत निकाले जा रहे हैं। अगर शीला दीक्षित जो कि एक परिपक्व नेता है अपने बयान की अगली लाइन में ये न कहती कि राहुल को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की तैयारी की जा रही है। शीला जी ने राहुल के नेतृत्व पर कोई सवाल नहीं उठाया, उनका मतलब उनकी उम्र से था क्योंकि शीला जी की उम्र के लिहाज से देखा जाए तो राहुल गांधी और शीला दीक्षित में काफी अंतर है। तो बस यहां इस बयान के गलत मायने निकाल कर बातों को दूसरे तरीके से पेश किया जा रहा है।

नरेंद्र सिंह राणा ने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी शीला दीक्षित को गलत माने या राहुल को सही माने तो ये उनको मुबारक हो लोकतंत्र में जनमत का आदर होना चाहिए और ये बयान उनकी व्यक्तिगत बात हो सकती है। बीएमसी चुनाव पर नरेंद्र सिंह ने कहा कि 2012 में जब अखिलेश यादव बहुमत से सीएम बने थे  तो दो महीने बाद नगर निदगम के चुनाव में बीजेपी प्रचंड बहुमत से जीती थी। लोग हमारे कामों की वजह से हमें वोट देते हैं। बीजेपी ज़मीर चाहती है, कांग्रेस अमीर चाहती है। बीजेपी पार्टी वाले चाहती है तो कांग्रेस परिवार वाले चाहती है।

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