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उत्तरप्रदेश को अखिलेश और राहुल की जोड़ी पसंद है या नहीं यह तो बाद की बात है लेकिन फ़िलहाल अपनी ही पार्टी में बेगाने हुए सपा के संस्थापक से संरक्षक बने मुलायम सिंह को यह नयी जोड़ी बिलकुल पसंद नहीं आ रही है।  कांग्रेस-सपा गठबंधन से अखिलेश को भले फायदा होता दिख रहा है और राहुल इसे गंगा-यमुना मिलन बता रहे हैं।लेकिन राजनीती के माहिर खिलाडी नेताजी इसे पार्टी के लिए नुकसान का सौदा मान रहे हैं।

मुलायम सिंह जब पार्टी के अध्यक्ष थे तब भी वह कांग्रेस और अन्य पार्टियों से गठबंधन के खिलाफ थे और आज भी उनका वही रुख कायम है।  उन्होंने कहा था कि, “हमें किसी गठबंधन और सहयोगी की जरुरत नहीं है हमारी पार्टी पूर्ण बहुमत से सरकार में थी और हम अकेले ही दुबारा जीत हासिल करने में सक्षम हैं।”

सपा अध्यक्ष और बेटे अखिलेश के इस फैसले का विरोध करते हुए मुलायम ने साफ़ शब्दों में कहा कि, “वह गठबंधन के लिए प्रचार नहीं करेंगे और वह इसके खिलाफ हैं। समाजवादी पार्टी ने हमेशा कांग्रेस का विरोध किया है, क्योंकि कांग्रेस ने अपने 70 साल के शासन में देश को पीछे ले जाने का ही काम किया है। लिहाजा वे इस गठबंधन के समर्थन में कहीं भी प्रचार करने नहीं जाएंगे।।” कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की साझा प्रेस-कांफ्रेंस के बाद संयुक्त रोड शो निकालने से भी मुलायम सिंह नाखुश दिखे।  

गौरतलब है कि मुलायम ने कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ अपने समर्थकों से चुनाव लड़ने को भी कह दिया है।अब देखना दिलचस्प होगा की सपा के नए अध्यक्ष इस फैसले को कैसे सही साबित करते हैं और नेताजी को मना पाते हैं या नहीं?मुलायम सिंह यादव अगर गठबंधन के विरोध के अपने फैसले पर कायम रहे तो यह सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। साथ ही अगर मुलायम के समर्थक कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव में ताल ठोकते हैं तो यह भी कांग्रेस-सपा की सत्ता वापसी के सपनों में बड़ा रोड़ा बन सकता है।   

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