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New Delhi: गुजरात सरकार के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संदीप मुंज्यसारा की अपील पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगी। मुंज्यसारा की दायर याचिका में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) का उल्लंघन करने पर गुजरात सरकार पर उचित कार्रवाई करने को कहा गया है। गुजरात सरकार पर आरटीई अधिनियम के तहत आने वाले प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

अप्रैल में गुजरात उच्च न्यायालय ने मुंज्यसारा की इस जनहित याचिका को खारिज कर दी थी। गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा था कि वह राज्य सरकार के आरटीई के तहत उठाए जा रह कदमों से संतुष्ट है। उच्च न्यायालय का कहना था कि गुजरात सरकार निजी स्कूलों में समाज के कमजोर वर्गों के बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए आरटीई प्रावधानों का पालन कर रही है।

कार्यकर्ता ने दावा किया है कि उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका में शामिल बिंदुओं पर गौर ही नहीं किया है। आरटीई के तहत शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले प्रवेश प्रक्रिया को खत्म करने का आदेश राज्य सरकार को दे। शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी दायर याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता ने यही मांग की है।

उन्होंने आगे दावा किया कि सरकारी अधिकारियों को आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग छह महीने लगते हैं। इस वजह से प्रवेश प्रक्रिया अक्सर अगस्त-सितंबर तक चलती रहती है। राज्य सरकार के इस सुस्त रवैये के कारण 2016-17 में 47,271 सीटें और 2017-18 में 33,839 सीटें खाली रह गईं थीं। इन सीटों को आरटीई के तहत प्रवेश के लिए शामिल थीं।

प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने में अनावश्यक देरी के कारण छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जो छात्र आरटीई के तहत प्रवेश प्राप्त करते हैं, वे शैक्षणिक सत्र के पहले दिन से अध्ययन करने का अवसर खो देते हैं।

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