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भारत पर्वों का देश है और इस वक्त पूरे भारत में पर्वों का मेला चल रहा है। पर्वों के इस क्रम में नवमी, दशहरा, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा बीत जाने के बाद आज से छठ पूजा शुरु होने जा रहा है। छठ पूजा पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और नेपाल के कई तराई क्षेत्रों में परंपरागत रूप से मनाया जाता है। इस त्यौहार को कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली मनाने के बाद मनाया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी की तिथि तक भगवान सूर्यदेव की अटल आस्था का पर्व छठ पूजा मनाया जाता है। चार दिन तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है। इस त्यौहार में लोग माता छठी और भगवान सूर्य की उपासना और उनकी पूजा करते हैं।

आज से यानी मंगलवार को नहाने और खाने से इस त्यौहार की शुरुआत की जाती है। आखिर के दोनों दिन ही नदी, तालाब या किसी जल स्रोत में कमर तक पानी में जाकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रत से पहले आत्मिक शुद्धता के लिए नहाय-खाय का आयोजन होता है। छठ में के दिन षष्ठी को डूबते हुए सूर्य और सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन व्रती महिलाएं स्नान पूजन कर कद्दू चावल के बने प्रसाद को ग्रहण करती हैं।

छठ करने वाली व्रती महिला या पुरुष चने की दाल और लौकी शुद्ध घी में सब्जी बनाती है। उसमें सेंधा शुद्ध नमक ही डालते हैं।

महिलाएं और पुरूष नदी किनारे बैठकर छठी मैय्या के गीत का गुणगान करतीं हैं। उनकी पूजा-अर्चना करती हैं। इस त्यौहार में ढेर सारे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। पूजन सामग्री में शहद की डिब्बी, पान, साबूत सुपारी, कैराव, सिंदूर, कपूर, कुमकुम, चावल, चन्दन, बांस, सूप, दौरा, डलिया, पानी वाला नारियल, गन्ना, शकरकंदी, हल्दी और अदरक का हरा पौधा, नाशपाती, बड़ा नींबू आदि शामिल होते हैं। इनके अलावा घरों में ठेकुवा, खस्ता, पुवा आदि भी तैयार किया जाता है। पूजा-पाठ के बाद प्रसादों को लोगों में बांटा जाता है। माना जाता है कि प्रसाद खाने से सारी मनोकामना पूरी हो जाती है।

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