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New Delhi: गणेश उत्सव पूरे देश में मनाया जा रहा है लेकिन इसी दौरान मंगलवार को जब यौमे आशुरा यानी मुसलमानों की मुहर्रम पड़ी तो कर्नाटक के हुबली जिले से सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देने के लिए हिंदु मुसलमान एक मंच पर अपनी धार्मक आस्था के साथ आए। यहां एक ही पांडाल के नीचे हिंदुओं ने गणेश चतुर्थी मनाई तो वहीं मुसलमानों ने मुहर्रम की मजलिस अदा की। ये सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल यहां से पूरे देश के लिए दी गई है।

एक स्थानीय मुस्लिम श्रद्धालु मोहम्मद शाम ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “हम सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश भेजना चाहते हैं, जो इस समय बहुत महत्वपूर्ण है।” हिंदू और मुसलमान दोनों एक ही स्थान पर एकत्र होते हैं, जहां गणेश चतुर्थी और मुहर्रम के लिए व्यवस्था की गई है। दोनों समुदाय एक ही छत के नीचे अपने-अपने नीति नियमों के अनुसार प्रार्थना करते हैं।

इस गांव में लगभग 4,000 लोग रहते हैं और हम सभी सौहार्द से रहते हैं। यहाँ, समुदाय एक के रूप में एक साथ काम करते हैं, “एक अन्य स्थानीय जो प्रार्थना करने के लिए पंडाल में आया था। स्थानीय लोगों ने बताया, गाँव के लोग सभी त्यौहारों को एक साथ मनाते हैं, चाहे वह होली हो, दिवाली या ईद हो। गांव की ही एक हिंदु श्रद्धालु रेशमा ने कहा, “हम गांव में भाई-बहनों की तरह रहते हैं और सभी त्योहार एक साथ मनाते हैं।”

बता दें ऐसी मान्‍यता है कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था जिसे गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस त्‍योहार में यश, सम्मान और सुख-समृद्धि के लिए गणेश जी की पूजा की जाती है।

भगवान गणेश के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला गणेश चतुर्थी का यह पर्व महाराष्ट्र में बड़ी ही मान्यता के साथ मनाया जाता। लेकिन अब आलम यह है कि गणेश चतुर्थी उत्तर भारत से लेकर देश के और भी कई हिस्सों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। अगर आपको इस त्योहार का असली महत्व जानना है तो आप एक बार महाराष्ट्र जरूर जाएं। इस त्योहार के मौके पर पूरा महाराष्ट्र एक अलग ही रंग में रंगा नजर आता है।

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