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हिंदू धर्म में करवा चौथ का दिन सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए उपवास रखती है। महिलाएं पति के सौभाग्य और लंबी उम्र के लिए चौथ माता की पूजा करती हैं। व्रत रखती हैं। करवाचौथ का त्यौहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। कार्तिक मास की चतुर्थी जिस रात रहती है उसी दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 27 अक्टूबर को किया जाएगा।

इस साल करवाचौथ पर गुरु और चंद्र के दृष्टि संबंध की वजह से गज केसरी योग बन रहा है। गुरु ग्रह वृश्चिक राशि में है और चंद्र वृष राशि में रहेगा। ये एक शुभ योग है। इसके साथ ही 27 को सर्वार्थसिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं। इन तीन शुभ योगों में चौथ माता की पूजा करने से महिलाओं की सभी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। ज्योतिर्विद पं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली के अनुसार पूजा मुहूर्त- सायंकाल 6:35- रात 8:00 तक पूजन करे परंतु अर्घ्य 8 बजे के बाद, चंद्रोदयके बाद सायंकाल 7:38 बजे के बाद पूजा का सही समय है।

करवा चौथ कैसे मनाया जाता है
महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सर्गी खाती हैं। यह खाना आमतौर पर उनकी सास बनाती हैं। इसे खाने के बाद महिलाएं पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं। दिन में शिव,पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम को देवी की पूजा होती है, जिसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाता है।

करवा चौथ के दिन महिलाएं चांद और पति को छलनी से इसीलिए देखती हैं :
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है और चांद को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है। चांद में सुंदरता, शीतलता, प्रेम, प्रसिद्धि और लंबी आयु जैसे गुण पाए जाते हैं। इसीलिए सभी महिलाएं चांद को देखकर ये कामना करती हैं कि ये सभी गुण उनके पति में आ जाएं।

करवा चौथ व्रत पूजनविधि: 
चंद्रमा, शिव, पार्वती, स्वामी कार्तिकेय और गौरा की मूर्तियों की पूजा षोडशोपचार विधि से विधिवत करके एक तांबे या मिट्टी के पात्र में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री, जैसे- सिंदूर, चूडियां, शीशा, कंघी, रिबन और रुपया रखकर उम्र में किसी बड़ी सुहागिन महिला या अपनी सास के पांव छूकर उन्हें भेंट करनी चाहिए। सायं बेला पर पुरोहित से कथा सुनें, दान-दक्षिणा दें। तत्पश्चात रात्रि में जब पूर्ण चंद्रोदय हो जाए तब चंद्रमा को छलनी से देखकर अर्घ्य दें। आरती उतारें और अपने पति का दर्शन करते हुए पूजा करें। इससे पति की उम्र लंबी होती है।उसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलें।

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