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मां दुर्गा के भांति-भांति के भक्त हैं । नवरात्रि में राजधानी पटना के नौलखा मंदिर समेत औरंगाबाद, अररिया, पूर्णिया और समस्तीपुर के रोसड़ा में भी भक्त छाती पर कलश  रखकर नौ दिनों तक उपवास रख रहे हैं । मां दुर्गा  के ऐसे हीं परमभक्तों में से एक हैं पटना के  नागेश्वर बाबा । नागेश्वर बाबा  इस बार भी सीने पर कलश लेकर मां की आराधना में लीन हो गए हैं। नया सचिवालय के पास  नौलखा मंदिर में  नागेश्वर बाबा के सीने पर 21कलश स्थापित किए गए हैं। मां के दरबार में सीने पर कलश लिए बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है ।

छाती पर कलश रख कर आराधना कर रहे नागेश्वर बाबा ने बताया कि ‘मुझे देवी से ऐसा करने की ऊर्जा मिलती है. मैं नवरात्रि से 15 दिन पहले उपवास करना शुरू करता हूं. बहुत से भक्त यहां मां से आशीर्वाद मांगने के लिए आते हैं. पिछले 22 साल से हर नवरात्रि पर नागेश्वर बाबा नौलखा मंदिर में अपने सीने पर 21 कलश रखते आ रहे हैं. ।

हर साल नागेश्वर अपने सीने पर पिछले साल से एक कलश ज्यादा रखते हैं। इन कलश में गंगाजल होता है। मूलरूप से दरभंगा निवासी नागेश्वर दावा करते हैं कि उनके सपने में आकर मां दुर्गा ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था।.

नागेश्वर बाबा का कहना है कि नवरात्र के दौरान कठोर तप करने करने का  मुख्य उद्देश्य है समाज और देश में शांति एवं विकास का माहौल बनाने के लिए मां दुर्गा से कामना करना ।. नागेश्वर बाबा  चाहते हैं कि मां दुर्गा देश को संकटों से बाहर निकाले और देशवासियों पर उनकी कृपा बरसे.

नौ दिनों में वह न कुछ खाते-पीते हैं और न ही करवट लेते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे में इंसान में कमजोरी तो आती है लेकिन इच्छाशक्ति के सहारे यह काम किया जा सकता है। नागेश्वर बाबा इस स्थल पर तीन दशक से दुर्गापूजा कर रहे हैं। शुरुआती दिनों में वे रोजी-रोटी के लिए आसपास की दुकानों में पानी पहुंचाने का काम करते थे.. लेकिन बाद में वह मां दुर्गा के भक्ति भाव में इस कदर डूबे की अब जैसे वह मां दुर्गा के हीं होकर रह गए हैं.।

औरंगाबाद
औरंगाबाद में देवी दुर्गा की आराधना में भक्त स्वयं को समर्पित करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाते रहे हैं. औरंगाबाद के देव में एक महिला श्रद्धालु चंचला देवी अनोखे ढंग से एक-एक कर ऊपर-नीचे नौ कलश सीने पर रख कर नौ दिवसीय साधना में लीन हैं ।

अररिया
अररिया में मुख्य दुर्गा मंदिर कपरफोड़ा परिसर में भी सीने पर कलश स्थापित कर साधना की जा रही है. उन्होंने बताया कि एक माह पूर्व से ही दिन में एक बार फलाहार किया, तो किसी ने बताया कि दस दिन पूर्व से अन्न का प्रयोग छोड़ दिया और फल का सेवन किया. यहां सीने पर कलश स्थापित कर कष्ट साध्य साधना में लीन मेगरा वार्ड संख्या-2 निवासी 40 वर्षीया रंभा देवी, सिझुआ वार्ड संख्या-12 निवासी 40 वर्षीया ज्ञानी देवी, सिझुआ वार्ड संख्या-13 निवासी 14 वर्षीया मनीषा कुमारी, लक्ष्मीपुर की 16 वर्षीया विनीता कुमारी, बघुआ गोसनगर वार्ड संख्या-8 निवासी 35 वर्षीया हरण देवी शामिल हैं.

पूर्णिया
पूर्णिया की बनमनखी नगर पंचायत के वार्ड नंबर-3 के प्राचीन शक्ति पीठ काझी हृदयनगर दुर्गा स्थान रोड में मां काली मंदिर स्थित मां काली की मूर्ति के बगल में एक भक्त छाती पर कलश स्थापित किया है. बनमनखी समेत आसपास के जिलों के लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ रही है. सीने पर कलश स्थापित करनेवाले मधेपुरा जिले शंकरपुर प्रखंड के मोरा रामनगर ग्राम निवासी जगदीश दास के पुत्र ललन कुमार दास हैं, जो कि इससे पहले भी तीन बार अपने गांव में अपनी कुल देवी के समक्ष छाती पर कलश स्थापित कर चुके हैं. कलश स्थापित करनेवाले ललन कुमार दास के पिता जगदीश दास ने बताया कि कलश स्थापना के एक-दो सप्ताह पूर्व ही ललन अन्न-जल का परित्याग कर देते हैं और निर्जला व्रत में रहकर विजया दशमी तक छाती पर कलश रखकर मां की आराधना में लगे रहते हैं.

समस्तीपुर
समस्तीपुर में भी शारदीय नवरात्रा में माता शक्ति की उपासना के अनेकों रूप देखने को मिल रहे हैं. मां दुर्गा को स्वप्न में देख कर लालपुर का एक युवक मुरादपुर दुर्गा स्थान में छाती पर कलश स्थापित कर शक्ति उपासना में लीन हो गया. छाती पर कलश स्थापित करनेवाले लालपुर निवासी दहाउर पंडित के 30 वर्षीय पुत्र अशोक पंडित ने बताया कि मैया ने स्वप्न में इस तरह भक्ति करने पर कल्याण होने का आशीर्वाद दिया था. वहीं, बाघोपुर दुर्गा मंदि र में स्थानीय रामकरण शर्मा की पत्नी रमिया देवी पोता होने की मन्नत पूरी होने पर अपने सीने पर कलश स्थापित कर माता को दिया  वचन पूरा कर रही है. कुछ ऐसा ही भक्ति हनुमान नगर दुर्गा मंदिर परिसर में दृश्यमान हो रहा है. यहां स्थानीय भरवारी पंचायत के युवा सरपंच रौशन कुमार चौधरी अपनी छाती पर कलश स्थापित कर मां दुर्गा की साधना में लगे हैं. उन्होंने कहा कि मैया की कृपा से मेरी मन्नत पूरी हो गयी. वहीं, सिंघियाघाट में रहुआ गांव की मौला देवी भी सीने पर कलश रख कर माता दुर्गा की आराधना में जुटी है ।

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