Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

पूर्व वित्त और गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी को लेकर तरह तरह के आरोप औऱ प्रत्यापरोप लग रहे हैं। ये वही पी चिदंबरम जिन्होंने कभी कांग्रेस को छोड़ कर तमिल मानिला कांग्रेस बनाई थी और देवेगौड़ा सरकार में उनके 1997-98 के बजट को ड्रीम बजट कहा गया था।

उसके बाद वह मनमोहन सिंह की सरकार में वित्त मंत्री और गृह मंत्री रहे। उऩकी छवि एक सख्त प्रशासक की रही। लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद अब वह आरोपों के घेरे में हैं। अगर पी चिदंबरम ने कोई घोटाला किया है औऱ अपने पद का दुरुपयोग कर अपने बेटे को फायदा पहुंचाया तो जरूर उन्हें कानून के हिसाब से सजा मिलनी चाहिए। अगर चिदंबरम दोषी साबित होते हैं और सजा मिलती है तो इस धारणा को भी बल मिलेगा कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और कानून की नजर में सब बराबर हैं। 

2014 में मोदी सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद से न केवल चिदंबरम वल्कि कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष और मौजूदा अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोतीलाल वोरा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के साथ-साथ सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ भी मामले खुले हैं।

भारतीय राजनीति में ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है और ऐसी कार्रवाइयों का लंबा इतिहास रहा है। इमरजेंसी के बाद जनता पार्टी के सरकार में इंदिरा गांधी के खिलाफ तमाम मामले खुले। 1989 में वी पी सिंह की सरकार में राजीव गांधी के शासन की गड़बड़ियों के मामले उछले। इनमें सबसे अहम तो वोफोर्स ही रहा। यही नहीं वी पी सिंह के भतीजे के खिलाफ   भी मामला चलाया गया। ये अलग बात है कि सीबीआई इन मामलों को किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा सकी। नतीजा सिफर ही रहा और कोई भी कद्दावर नेता कभी जेल नहीं गया। लालू प्रसाद यादव औऱ ओम प्रकाश चौटाला अपवाद हैं। हालांकि उनको सजा अपने राज्यों में किये गये घोटालों पर मिली। 

राष्ट्रीय स्तर पर ये सारे मामले बदले की भावना से ही प्रेरित लगे। चिदंबरम के मामले में भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। पांच दिसंबर 2018 को राजस्थान के सुमेरपुर की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने पी चिदंबरम का नाम लिए बगैर कहा था, ‘’ नामदार की बड़ी सेवा करने वाले, वे मानते हैं कि बुद्धि भगवान ने सिर्फ उन्हें ही दी है. वे गृह मंत्री रहे, वित्त मंत्री रहे. हुआ क्या, भाइयों और बहनों, ये चायवाले की ताकत देखिए,  ये महाशय भी अपने सुप्रीम कोर्ट के वकील के नाते कोर्ट में गिड़गिड़ाते हैं, कितने दिन तक मदद लेते रहोगे, एक दिन न्याय निकलने वाला है, तुम भी जेल की सलाखों में होंगे।‘’ एक रैली में कहा गया ये वाक्य इशारा करता है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह 2002 के गुजरात दंगों और सोहराबुद्दीन शेख मामले की जांच को भूले नहीं हैं। 

जहां तक सीबीआई की निष्पक्षता का सवाल है तो कांग्रेस की सत्ता के दौरान यही नेता सीबीआई को सरकार की जेबी संस्था बताने से नहीं चूकते थे। कोयला घोटाले की जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ही सीबीआई को पिंजरे में बंद तोते की उपाधि दी थी और उसके बाद से विपक्ष इस ‘उपाधि’ को ले उड़ा। यही नहीं, कुछ दिन पहले ही प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भी सीबीआई के ही एक समारोह में कहा था कि राजनीतिक मामलों में जांच को लेकर सीबीआई का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है।

जस्टिस गोगोई ने कहा था, ‘’सीबीआई की अपनी एक खास जगह है, लेकिन उसकी नाकामियों ने देश के आम लोगों का ध्यान ज्यादा खींचा है।‘’ उन्होंने सवाल किया, ‘’ऐसा क्यों होता है कि जब किसी मामले का कोई राजनीतिक रंग नहीं होता, तब सीबीआई अच्छा काम करती है।‘’

अब कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि बीजेपी सरकार सीबीआई समेत अन्य जांच एजेंसियों की मदद से विपक्षी नेताओं को डरा रही है। जबकि बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि सरकारी जांच एजेंसियां बिना किसी दखल के जांच कर रही हैं और कानून अपना काम कर रहा है। 

ऐसे में ये सवाल तो है कि सीबीआई की निष्पक्षता कैसे स्थापित हो लेकिन उससे भी बड़ा ये सवाल है कि चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस या कोई और दल, सरकारों की निष्पक्षता कैसे स्थापित होगी? सवाल नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में सरकार की कार्रवाइयों पर जनता के भरोसे का है। इस दिशा में शायद ही आज तक किसी भी दल की सरकार ने कोई काम किया है।

अब तक तो भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों में फंसे अपने नेताओं को बचाना और विपक्षी नेताओं को फंसाना ही होता आ रहा है। उत्तर प्रदेश पर ही नजर डालें तो आपराधिक मामलों में फंसे बीजेपी के नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले राज्य सरकार खुद ही धीरे धीरे वापस ले रही है। ऐसे में जब तक सरकारें अपने ही दलों के आरोपी नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करेंगी, जनता को राजनीतिक मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिला पाना मुश्किल ही होगा। 

  • नीरज कुमार
Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.