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कुदरत के कहर की वजह से देश-विदेश के लाखों-करोड़ों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। कुदरत का यह कहर कभी सुनामी के रूप में आता है तो कभी भूकंप के रूप में। अचानक होने वाली ऐसी घटनाओं के बार में आमतौर पर किसी के पास कोई ठोस जानकारी नहीं होती है लिहाजा लोगों को पहले से सचेत होने का भी मौका नहीं मिल पाता। इस समस्या से पार पाने के लिए भारत ने एक नया तरीका खोज निकाला है। जी हां भारत एक ऐसी प्रणाली पर काम कर रहा है जिससे भूकंप का पूर्वानुमान लगाया जा सके। इस प्रणाली का काम पूरा होने के बाद भूकंप आने से पहले ही लोगों को सूचित किया जा सकेगा और लाखों-करोड़ों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हषर्वर्धन ने कहा कि दुनिया में अभी कहीं पर भी भूचाल, भूकंप का पूर्वानुमान लगाने की प्रणाली नहीं है। इस दिशा में कार्य चल रहे हैं और भारत में भी प्रयास जारी है। मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार,  इस संबंध में भारत का आईआईटी रूड़की और ताइवान मिलकर शोध कर रहे हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के तहत राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान नेटवर्क का उन्नयन किया जा रहा है। इसके तहत 84 डिजिटल केंद्रों को इस प्रकार से सक्षम बनाया गया है कि देश में कहीं भी 3 से अधिक तीव्रता के भूकंप का पांच मिनट के भीतर पता लगाया जा सके।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम राजीवन ने बताया कि इस वक्त देशभर में नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के कुल 84 स्टेशन और 150 वेधशालाएं हैं जिसे 2017 के अंत तक बढ़ाकर 116 कर दिया जाएगा जो राष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि इन स्टेशनों और वेधशालाओं को परिचालन केंद्र के जरिए वीसैट संचार प्रणाली से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि हम इसमें और सुधार कर रहे हैं, जिससे जल्द ही तीन मिनट के भीतर भूकंप की जानकारी एकत्र की जा सकेगी।

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