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कर्नाटक में बीजेपी ने किसी तरह सरकार तो बना ली लेकिन, उसके सामने मुश्किलें में तमाम हैं। कांग्रेस के 14 और जेडीएस के 3 विधायकों के इस्तीफे और फिर उन्हें अयोग्य ठहराए जाने के बाद विधानसभा में 17 सीटें फिलहाल खाली हैं।

नियमों के मुताबिक इन सीटों पर छह महीने के अंदर उपचुनाव हो जाने चाहिए। उधर बीजेपी को उम्मीद है, कि अभी कुछ और नेता पाला बदलेंगे यानी उपचुनाव के लिए सीटों की संख्या और बढ़ेगी। इस कारण बीजेपी का एक धड़ा जहां मध्यावधि चुनाव में जाने की बात कह रहा है। तो दूसरा कैसे भी करके सरकार चलाने के साथ खड़ा है।

मध्यावति चुनाव चाहने वाला गुट अगर पार्टी नेतृत्व को समझाने में कामयाब हो जाता है। तो दिसंबर या जनवरी में कर्नाटक में नए सिरे से विधानसभा चुनाव हो सकते हैं वैसे भी बीजेपी के लिए वर्तमान में सरकार चलाना किसी मुसीबत से कम नहीं है।

105 विधायकों वाली बीजेपी को 224 सदस्यों वाले सदन में बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 9 सीटें जीतनी होंगी ये काफी कड़ा इम्तहान है। क्योंकि, जिन 17 सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमें से ज्यादातर कांग्रेस या जेडीएस का मजबूत गढ़ हैं ऐसे में पार्टी के लिए यहां जीत हासिल करना आसान नहीं होगा।

बीजेपी कोर कमिटी की बैठक में भी मध्यावधि चुनाव को मसले पर चर्चा हुई थी। मध्यावति चुनाव चाहने वालों की दलील है कि, उपचुनाव में उतरना सरकार की स्थिरता के लिए खतरा हो सकता है। एक सीट का भी हेर-फेर खेल खराब करने वाला साबित होगा जबकि, नए चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करना इससे बेहतर विकल्प है। जरूरी है कि, सदन में संख्याबल हो ताकि, दूसरों पर निर्भर रहकर मजबूरी का गठबंधन चलाने की जरुरत ना पड़े।

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