Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुनामी ने वो समा बांधा कि 6 पार्टियों के महागठबंधन की हवा निकल गई। बिहार में बीजेपी समर्थिक एनडीए ने बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से 39 सीटें जीत कर इतिहास रच दिया। चुनाव से पहले आरजेडी, कांग्रेस, रालोसपा, हम, वीआईपी और सीपीआईएम ने गठबंधन किया था इस पूरे गठबंधन को बिहार में केवल एक किशनगंज की सीट मिली।

बिहार में वर्ष 1997 में आरजेडी की स्थापना हुई थी जिसके बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब लालू प्रसाद यादव की पार्टी ने लोकसभा चुनाव में खाता भी नहीं खोला हो। पीएम मोदी और नीतीश की जोड़ी ने ऐसी रणनीति तैयार की कि एनडीए की झोली में 40 में से 39 आ गिरीं और कांग्रेस के खाते में किशनगंज की सीट आई।

बिहार में एनडीए की तरफ से बीजेपी और जेडी (यू) ने 17-17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। जबकि राम विलास पासवान की लोकजनशक्ति पार्टी ने बाकी बची 6 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। बीजेपी और एलजेपी ने जहां सभी सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं जेडीयू की केवल एक सीट पर हार हुई। अगर 2014 के लोकसभा नतीजों की बात करें तो बीजेपी और एलजेपी की एनडीए ने 31 सीटें जीती। आरजेडी-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के खाते में सिर्फ 7 सीटें आई थीं। वहीं अकेले लड़ी जेडीयू को सिर्फ 2 सीटें ही मिली थी।

2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के घटक दलों में जबरदस्त तालमेल देखने को मिला। सीएम नीतीश कुमार ने चुनाव के दौरान 171 जनसभाएं कीं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ 8, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के साथ 23 और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के साथ 22 सभाएं भी शामिल हैं।

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.