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छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद के मामले में राज्य सरकार, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनके बेटे अभिषेक सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मंगलवार (13 फरवरी) को कोर्ट ने मामले की SIT जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा हमें कोई ऐसा आधार नहीं मिला, जिससे याचिकाकर्ता को कोई राहत दी जा सके।

कोर्ट ने कहा कि सरकार हेलीकॉप्टर का चयन करने का अधिकार रखती है। ऐसा कोई भी सामने नहीं आया जो दावा करे कि उसने सरकार की तरफ से चुकाई गई कीमत से कम में हेलीकॉप्टर देने का प्रस्ताव दिया था। ऐसे में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने की दलील निराधार है। मुख्यमंत्री के बेटे को सौदे से फायदा पहुंचने का कोई सबूत नहीं है। सौदे को अंजाम देने की प्रक्रिया में हुई कुछ कमियों के आधार पर जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता। अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल याचिका जनहित की होनी चाहिए। बिना ठोस सबूत के एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की तरफ से दाखिल याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है।

याचिकाकर्ता ने 2007 में हुई इस खरीद में लगभग 10 करोड़ रुपए की कमीशनखोरी का आरोप लगाया था। याचिका में कहा गया था कि इस खरीद के लिए घूस दी गई और 30 फीसदी कमीशन दिया गया। याचिका में कहा गया कि मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह भी इस विवाद से जुड़े हैं क्योंकि 6.3 मिलियन डॉलर के हेलीकॉप्टर खरीदने के छह महीने बाद उन्होंने एक शेल कंपनी बनाई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप को गलत बताया और कहा कि यूरोकॉप्टर और दूसरी कंपनी के हेलीकॉप्टर का स्तर सही नहीं पाया गया । सिर्फ ऑगस्टा वेस्टलैंड का हेलीकॉप्टर ही ज़रूरत को पूरा करने वाला था इसलिए सिर्फ उसकी खरीद के लिए टेंडर जारी किया गया। जनहित याचिका में आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और झारखंड में भी अगस्ता हेलिकॉप्टर खरीद की घोटाला किया गया है।

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