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क्या एक वक्त देश की राजनीति में तूफान ला देने वाला बोफोर्स केस हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि देश के सबसे बड़े लॉ ऑफिसर यानि अटॉर्नी जनरल ने सरकार को सलाह दी है कि CBI को इस मामले में सभी आरोपियों के बरी किये जाने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर नहीं करनी चाहिए। हालांकि CBI  इस मामले में पहले से ही लंबित याचिका को लेकर जवाब दाखिल कर सकती है।

दिल्ली  हाईकोर्ट ने मई  2005 में हिंदुजा बंधुओ को बरी कर दिया था। एजी ने सलाह दी है कि ऐसे में बारह साल बाद अगर CBI सुप्रीम कोर्ट का रुख करती है, तो सुप्रीम कोर्ट देरी के आधार अपील  खारिज कर सकता है क्योंकि अपील में देरी को  सही साबित करने के लिए CBI के पास कोई सबुत भी नहीं है।

अटॉनी जनरल की  इस सलाह के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता अजय अग्रवाल ने उन्हें चिट्टी लिखी है। अग्रवाल ने एटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल को पत्र लिखकर कहा है कि वह वह CBI से कहे कि उनकी अपील के जवाब में जल्द ही CBI को दस्तावेजों के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दें। पिछले 12 साल से ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। CBI ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल नहीं की है और इसको लेकर दायर याचिका पर भी अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने वकील अजय अग्रवाल की तरफ से अपील दाखिल करने पर सवाल उठाए थे और पूछा था कि साबित करे कि आपराधिक मामले में जांच एजेंसी के अलावा कोई और कैसे अपील कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह बेहद गंभीर और चिंतित करने वाला विषय है कि क्रिमिनल केस में तीसरा पक्ष कैसे याचिका दाखिल कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि अभी तक जिन मामलों में तीसरे पक्ष ने क्रिमिनल केस में अपील फाइल की है वह पीड़ित या उसके परिवार के सदस्य रहे हैं।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर क्रिमिनल केसों में भी तीसरे पक्ष को अपील दायर करने की इजाजत दे दी गई तो समस्या हो जाएगी।

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