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मणिपुर में सेना के हाथों फर्ज़ी मुठभेड़ के मामला में सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज न करने के लिए CBI को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने मंगलवार (16 जनवरी) को CBI को निर्देश दिया कि वह बिना फॉरेंसिक जांच का इंतज़ार करते हुए FIR दर्ज करे और उसके बाद जांच को आगे बढ़ाए। CBI की तरफ से ASG ने कहा कि FIR दर्ज करने से पहले उन्हें संबंधित कार्यालयों से मूल FIR इक्ट्ठी करनी होगी। इस पर जस्टिस  लोकूर ने कहा कि  हाईकोर्ट के निर्देश के चलते अबतक 18 FIR दर्ज हो जानी चाहिए थी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि मणिपुर में पुलिस और सेना के द्वारा फर्ज़ी एंकाउंटर किए गए लेकिन इस पर पुलिस और सुरक्षा बलों का कहना है कि इन  मुठभेड़ों में जो लोग मारे गए हैं वह आतंकवादी थे।

पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (AFSPA) लगे होने के बावजूद फर्जी मुठभेड़ की पुलिस जांच हो सकती है और सामान्य कोर्ट में मुकदमा भी चल सकता है। कोर्ट ने तब ऐसे मामलों की जांच के लिए CBI निदेशक को 5 अधिकारियों की विशेष टीम बनाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि ऐसे 42 मामलों में से 30 में CBI ने अब तक FIR दर्ज नहीं कि है। जबकि इसे 31 दिसंबर तक दर्ज किया जाना था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से 12 केसों की जांच कर 28 जनवरी तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। जबकि 31 जनवरी तक 30 केसों में FIR दर्ज करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई मार्च में होगी।

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