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दिल्ली हाईकोर्ट से दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को राहत मिली है…कोर्ट ने विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के सामने पेशी पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होगी। कोर्ट ने मामले पर दिल्ली के उप राज्यपाल और दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगा है।

इससे पहले अंशु प्रकाश की याचिका पर पहले डबल बेंच में सुनवाई हुई जिसने मामले को सिंगल बेंच के पास भेज दिया। डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान केजरीवाल सरकार को फटकार लगई और कहा कि आप दोनों को बैठ कर आपस में बात करनी चाहिए थी लेकिन सरकार अपने चीफ सेक्रेट्री की इज्ज़त ही नहीं कर रही है। सिंगल बेंच में चीफ सेक्रेटरी के वकील ने दलील रखी कि कि वह उपराज्यपाल के प्रति जवाबदेह हैं मुख्यमंत्री के प्रति नहीं। वकील ने ये तर्क भी रखा कि जिस कमिटी के सामने पेश होना है उस कमिटी में अमानतुल्लाह खान भी हैं और ये सबको पता है कि अमानतुल्लाह के साथ संबंध कैसे हैं। इस पर दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया कि ये समन नहीं है नोटिस है यानी एक तरह से मीटिंग में आने का आग्रह है।

मुख्य सचिव की ओर से कहा गया कि 11 लोगों ने मेरे साथ बदसलूकी की जिनमें से 2 जुडिशयल कस्टडी में हैं। अभी 9 की पहचान होनी है, मुझे नही पता कि 9 में से कोई उस कमिटी में है या नहीं। उपराज्यपाल की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि शूरवीर सिंह को जब विशेषाधिकार समिति ने बुलाया था उस समय उन्होंने कमिटी के सवालों का जवाब नहीं दिया था, लिहाजा, सरकार ने मुख्य सचिव से कहा कि शूरवीर सिंह की ACR में लिखा जाए कि शूरवीर सिंह के काम से सरकार खुश नहीं है।

अंशु प्रकाश ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करके दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी जिसमें उन्हें और दो अन्य IAS अफसरों को आज ही समिति के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। पिछले महीने 21 फरवरी को दिल्ली विधानसभा की प्रश्न एवं संदर्भ समिति की बैठक थी जिसमे मुख्य सचिव अंशु प्रकाश, रजिस्ट्रार और कॉपरेटिव सोसाइटी जे बी सिंह और पूर्व रजिस्ट्रार ऑफ कॉपरेटिव सोसाइटी शूरबीर सिंह को बुलाया गया था। हालांकि तीनों IAS अधिकारियों में से ना कोई बैठक में गया ना ही कोई सूचना दी थी…इसके बाद ये मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा गया था।

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