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कठुआ गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया है। सोमवार (16 अप्रैल) को सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने साफ किया कि अदालत का मकसद निष्पक्ष सुनवाई और पीड़ित की सुरक्षा तक केंद्रित है। उधर पीड़ित परिवार ने मामले की सुनवाई कठुआ से बाहर करवाने की अपील की है। अब मामले की सुनवाई अब 27 अप्रैल को होगी।

कठुआ में आठ साल की मासूम के साथ हुई हैवानियत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। पूरा देश गुस्से में हैं हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को भरोसा दिलाया है मामले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उधर देश की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को सुनवाई के दौरान जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने पूछा कि क्या मामले की सुनवाई जम्मू कश्मीर से बाहर हो सकती है या नही? कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वो पीड़ित परिवार को दी जा रही सुरक्षा देती रही और पीड़ित परिवार की वकील को भी सुरक्षा मुहैया करवाए।

सुनावई के दौरान चीफ जस्टिस ने साफ किया कि सुनवाई सिर्फ पीड़ित की सुरक्षा और फेयर ट्रायल पर ही केंद्रित रहेगी। याचिका में मांग की गयी है कि जिस जुवेनाइल होम में नाबालिग आरोपी को रखा गया है वहां किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को नाबालिग आरोपी से न मिलने दिया जाए। साथ ही ये मांग भी की गयी है कि कठुआ की अदालत तब तक इस मामले की सुनवाई न करे जब तक सुप्रीम कोर्ट केस को स्थानांतरित करने पर फैसला न सुनाए। पीड़ित के परिवार की ओर से कहा गया है कि वो सीबीआई जांच नहीं चाहते। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि मामले की सुनवाई राज्य से बाहर हो। हालांकि आरोपियों के परिजनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को फिलहाल सुनने से इनकार कर दिया है। ये याचिका वकील अनुजा कपूर ने दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमे इस चीज में नहीं जाना चाहिये कि इस केस की जांच कौन करे। मामले की सुनवाई अब 27 अप्रैल को होगी। वहीं कठुआ में मामले की चार्जशीट दाखिल करते वक्त पीड़ित पक्ष से वकीलों की धक्का-मुक्की की जांच के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पांच सदस्यों की टीम बनाई है। जांच में दोषी पाये जाने पर वकीलों का लाइसेंस जिंदगीभर के लिए रद्द किया जा सकता है। बार काउंसिल ने जम्मू हाईकोर्ट और कठुआ बार एसोसिएशन से हड़ताल तुरंत खत्म करने को भी कहा है।

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