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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को 12.19 एकड़ में बनी सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग का उद्‌घाटन किया। इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे। सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग को सुरंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट की पुरानी बिल्डिंग से जोड़ा गया है। इस पर 885 करोड़ रुपए का खर्च आया है।

नई इमारत में सुप्रीम कोर्ट की सभी फाइलों का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। इसके लिए एक आईटी सेल भी बनाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरी इमारत में 825 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पुरानी से नई बिल्डिंग तक जाने के लिए तीन भूमिगत रास्ते हैं जिसमें से एक रास्ता जजों के लिए, दूसरा सुप्रीम कोर्ट रिकार्ड के लाने ले जाने के लिए और तीसरा रास्ता वकीलों के लिए है।

नई इमारत में 1 लाख लीटर क्षमता का रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट भी लगा है, जो बरसाती जल को जमा करेगा। दो वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं। ये सीवेज वॉटर को पीने योग्य बनाएंगे। भवन निर्माण में 20 लाख डिमोलीशन वेस्ट के ब्लॉक लगाए गए हैं। पहली बार देश में किसी बिल्डिंग में इतनी अधिक मलबे का इस्तेमाल हुआ है। 1800 कारों की पार्किंग क्षमता है।

नई इमारत में सेंट्रलाइज्ड एसी है। यह 5 ब्लॉक में है। ज्यूडिशरी ब्लॉक, लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम है। बिजली की 40% जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी होगी। 650 और 250 लोगों की क्षमता वाले दो विश्व स्तरीय ऑडिटोरियम, एक मीटिंग रूम और एक बड़ा राउंड टेबल कांफ्रेंस रूम बनाया गया है।

इस मौके पर राष्ट्रपति कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के 9 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद की शुरू होने वाली सुविधा का अनावरण भी किया। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि अब सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी होंगे। ये फैसले सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी अपलोड किए जाएंगे।

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