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उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुए बहुचर्चित राजेश सिंह हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हत्याकांड के अभियुक्तों की गिरफ्तारी ना होने पर सख्त नाराज़गी जताते हुए मामले पर सरकार से जबाव तलब किया है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोईन की खण्डपीठ ने मामले की विवेचना को सीबीसीआईडी को सौंपे जाने पर भी नाराज़गी ज़ाहिर की, पीठ ने मामले की विवेचना पर भी रोक लगा दी। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या और विधायक संगम लाल गुप्ता के पत्र लिखने के बाद इस केस को सीबीसीआईडी को ट्रांसफर किया गया था।

हाईकोर्ट ने मामले में मंत्री और विधायक के हस्तक्षेप पर भी सख्त नाराजगी जतायी। बेंच ने प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी और एसपी प्रतापगढ़ से 21 दिसम्बर को कोर्ट में व्यक्तिगत हलफनामा देने को कहा है, कोर्ट ने पूछा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी क्यों इस मामले में अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि क्यों नहीं गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा के आदेश को रद्द किया जाए, गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा ने शातिर अपराधी और मामले में आरोपी पंकज मिश्रा के पिता छोटेलाल मिश्रा की अर्जी पर हत्या और रेप के पांच मामलों को सीबीसीआईडी को ट्रांसफर किया था।

बता दें कि 11 दिसम्बर 2016 को प्रतापगढ़ के कमासिन बाज़ार में बम और गोली मारकर राजेश सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस हमले में राजेश सिंह के ड्राइवर और गनर को भी गोली लगी थी। मृतक राजेश सिंह की पत्नी पूनम सिंह ने मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अब्दुल मोईन की खण्डपीठ में हुई सुनवाई हुई

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