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सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्षकार के वकील ने दलील देते हुए कहा, कि बाबरी मस्जिद के लिए किसी विशेष स्थान और जगह का महत्व नहीं है। क्योंकि मुस्लिम नमाज पढ़ने के लिए और कहीं भी जा सकते हैं। लेकिन हिंदुओं के लिए राम जन्मस्थली का धार्मिक महत्व है। उसे दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जा सकता। यह दलील रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील के परासरन ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष पेश की। बता दें इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।

कोर्ट में के परासरन ने पीठ के सामने कहा, कि अयोध्या विवाद 2.77 एकड़ जमीन का है। यह जगह हिंदुओं के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह भगवान राम की जन्मस्थली है। उन्होंने कहा, जिस तरह से मुस्लिमों में मक्का और मदीना का विशेष महत्व है, उसी तरह हिंदुओं में राम जन्मभूमि का विशेष महत्व है। परासरन ने कहा, यह मसला जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। इसका इस्माइल फारुखी फैसले से कोई लेनादेना नहीं है। इस मामले को संवैधानिक बेंच के पास भेजने का कोई मतलब नहीं है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इस्माइल फारुखी के फैसले में कहा था, कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। लेकिन इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्षकारों ने याचिका डालते हुए कहा था, कि इस फैसले के बारे में पुन: विचार किया जाना चाहिए। इसी कारण पहले मामले को संवैधानिक बेंच को भेजा जाना चाहिए। लेकिन इस पर परासरन ने दलील देते हुए कहा, कि वह मुद्दा जमीन अधिग्रहण के संबंध में था और मौजूदा मामला टाइटल विवाद है और ऐसे में उक्त जजमेंट का इस मामले से लेना-देना नहीं है और ऐसे में मामले को लार्जर बेंच या संवैधानिक बेंच को नहीं भेजा जाना चाहिए।

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