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आज सुप्रीम कोर्ट के चार जजों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस बीआर गवई, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के सूर्यकांत, झारखंड हाई कोर्ट अनिरुद्ध बोस और गुवाहाटी हाई कोर्ट के ए. एस. बोपन्ना ने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली। अब शीर्ष अदालत में जजों की निर्धारित संख्या 31 पूरी हो गई है। 2009 के बाद पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या 31 हो गई है।

संसद ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या को 26 से बढ़ाकर 31 कर दिया था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के नेतृत्व वाले कलिजियम ने 12 अप्रैल की अपनी सिफारिश को फिर से दोहराया। बता दें कि केंद्र ने पहले इन नामों को वरिष्ठता और राज्यों के प्रतिनिधित्व में समानता के नाम पर लौटा दिया था।

8 मई को कलिजियम के सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े, एनवी रमाना, अरुण मिश्रा और आरएफ नरीमन ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस गवई और हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के सीजे कांत की सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर नियुक्ति की सिफारिश की थी।

इससे पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया आरएम लोढ़ा, एचएल दत्तू, टीएस ठाकुर, जेएस खेहर और दीपक मिश्रा के नेतृत्व में कलिजियम कभी भी इतनी बड़ी संख्या में सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति नहीं करा पाया था। कलिजियम की सिफारिशों पर काम करने में केंद्र सरकार ने भी शीघ्रता दिखाई। केंद्र ने जस्टिस गुप्ता, रेड्डी, शाह और रस्तोगी की नियुक्ति में 48 घंटे से भी कम समय लिया।

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