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सुप्रीम कोर्ट ने गोरक्षकों द्वारा हिंसा के मामले में सोमवार (29 जनवरी) को हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने राज्यों के चीफ सेक्रेटरी से पूछा क्यों ना उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला चलाया जाए। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में अगली सुनवाई तीन अप्रैल को करेगा।

तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा कि पिछले साल 6 सितंबर को कोर्ट ने आदेश जारी कर कहा था कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा की घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। इतना ही नहीं कोर्ट ने कहा था कि हर जिले में नोडल अफसर बनाएं जाएं। इसके बावजूद इन तीन राज्यों में गोरक्षा के नाम पर हिंसा की वारदातें हो रही हैं. याचिका में ऐसी सात घटनाओं का जिक्र किया गया है।

बता दें कि गोरक्षा के नाम पर बने संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सर्वोच न्यायालय में सुनवाई हो रह रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि गोरक्षा के नाम पर हिंसा बंद होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हर राज्य में ऐसी घटनाओं से निपटने और रोकने के लिए हर जिले में वरिष्ठ पुलिस पुलिस अफसर नोडल अफसर बने।  नोडल अफस यह सुनिश्चित करे कि कोई भी कथित गौरक्षक दल कानून को अपने हाथों में ना ले।  अगर कोई घटना घटती है तो नोडल अफसर कानून के हिसाब से कार्रवाई करेने के लिए स्वतंत्र है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को DGP के साथ मिलकर हाइवे पर पेट्रोलिंग को लेकर रणनीति बनाने के लिए भी कहा था।

गोरक्षा के नाम पर बने संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर दायर की गई जनहित याचिका में मांग की गई है कि ऐसी हिंसा करने वाले संगठनों पर उसी तरह से पाबंदी लगाई जाए जैसे सिमी जैसे संगठन पर लगी है।

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