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नवरात्रि का आज सातवां दिन है। चैत्र नवरात्रि में इस बार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन (25 मार्च) मनाई जा रही है। इसलिए एक ही दिन कन्या पूजन होगा। इसी कारण अष्टमी व नवमी मनाने वाले शनिवार को व्रत रखेंगे और रविवार को कंजकों को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोलेंगे। अष्टमी को मां के आठवें स्वरूप महागौरी व नवमी को अधिष्ठात्री देवी सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है।

ज्योतिषियों की मानें तो अष्टमी तिथि 24 मार्च को सुबह 10 बजकर 15 मिनट से शुरू हो होगी और 25 मार्च रविवार को सुबह 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। वहीं नवमी तिथि अगले दिन 26 मार्च को सूर्य उदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

चैत्र नवरात्रि के नवमी को ही भगवान राम का जन्म हुआ था। इस दिन कन्याओं का पूजन किया जाता है। कहते हैं कि नौ कन्याओं को जिनमें 2 साल से लेकर 10 साल की कन्याओं को बैठाया जाता है। नवमी में कन्या पूजन 25 मार्च को सुबह 8 बजकर 15 मिनट के बाद ही किया जाएगा।

श्रीमद् देवीभागवत के अनुसार एक वर्ष की कन्या को नहीं बुलाना चाहिए, क्योंकि वह कन्या गंध भोग आदि पदार्थों के स्वाद से बिलकुल अनभिज्ञ रहती है। ‘कुमारी’ कन्या वह कहलाती है जो दो वर्ष की हो चुकी हो, तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष की चण्डिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती हैं।

इससे ऊपर की अवस्थावाली कन्या का पूजन नहीं करना चाहिए। कुमारियों की विधिवत पूजा करनी चाहिए। फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण कर अपने व्रत को पूरा कर ब्राह्मण को दक्षिणा दे कर और उनके पैर छू कर विदा करना चाहिए।

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