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आज देश में रामनवमी को धूम-धाम से मनाया जा रहा है। हमारे देश भारत में चैत्र मास की नवमी को भगवान राम का जन्मदिन मनाया जाता है, जिसे कि हम ‘रामनवमी’ कहते हैं। ‘भगवान राम’ ने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता पिता, यहां तक की पत्नी का भी साथ छोड़ा। ‘भगवान राम’ के जन्म को लेकर अलग-अलग पुराणों में अलग-अलग बातें लिखी हुईं हैं।

हिन्दू धर्म में, राम, विष्णु के दस अवतारों में से सातवें अवतार हैं, राम का चरित्र एक आदर्श व्यक्ति का है, राम की प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है। अक्सर धार्मिक लोगों और शोधकर्ताओं के बीच में भगवान राम को लेकर बहस छिड़ जाती है, हर किसी के अपने-अपने तर्क हैं और हर कोई भगवान राम को अपनी तरह से परिभाषित करता है।

वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, भगवान राम का जन्म चैत्र मास की नवमी को हुआ था और शादी के समय सीता मां की आयु केवल 6 साल थी। मां सीता भगवान राम के साथ 12 साल तक अयोध्या में रहीं थी उसके बाद 18 साल की थी तब भगवान राम के साथ वनवास चली गई थी।

आपको जान कर हैरानी होगी कि भगवान राम की एक बहन भी थीं दक्षिण की रामायण की मानें तो भगवान राम को मिलाकर चार भाई थे- राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न और एक बहन, जिनका नाम शान्ता था। शान्ता चारों भाईयों से बड़ी थीं। दक्षिण में लिखी गई रामायण में ऐसा लिखा गया है कि राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थीं, लेकिन पैदा होने के थोड़े ही दिन के बाद उन्हें अंगदेश के राजा रोमपद ने गोद ले लिया था।

भगवान राम की बड़ी बहन का पालन पोषण राजा रोमपद और उनकी पत्नी वर्शिनी (महारानी कौशल्या की बहन) ने किया। आगे चलकर शान्ता का विवाह ऋष्याश्रिंगा से हुआ। ऐसा माना जाता है कि ऋष्याश्रिंगा और शान्ता का वंश ही आगे चलकर सेंगर राजपूत बना। आज भी सेंगर राजपूत ही हैं, जिन्हें ऋषिवंशी राजपूत कहा जाता है।

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