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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) 1999 के कथित उल्लंघन के मामले में शिकंजा कसा जा सकता है। यह मामला बंद की जा चुकी चैंपियंस लीग-20 प्रतियोगिता में 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन से जुड़ा है। यह मामला बंद की जा चुकी चैंपियंस लीग-20 प्रतियोगिता में 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन से जुड़ा है।

बीसीसीआई के रिकॉर्ड्स के मुताबिक, उसने यह रकम क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) और क्रिकेट साउथ अफ्रीका (सीएसए) को मुनाफे और सरप्लस में हिस्सेदारी के रूप में दी थी। बीसीसीआई ने इसे ‘एडिशनल पार्टिसिपेशन फी’ कहा था। इसके अलावा इसमें टूर्नामेंट बंद करने का मुआवजा भी शामिल था। आरोप है कि यह भुगतान आरबीआई से इजाजत लिए बिना किया गया।

दरअसल, इंडियन प्रीमियर लीग की सफलता को देखते हुए बीसीसीआई ने 2008 में सीएऔर सीएसए के साथ एक संयुक्त उपक्रम बनाया। इस उपक्रम में बीसीसीआई की 50 फीसदी, जबकि सीए की 30 और सीएसए की 20 फीसदी हिस्सेदारी थी।

24 सितंबर, 2009 को बीसीसीआई की सालाना आमसभा में बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष शशांक मनोहर ने बोर्ड से चैंपियंस लीग टी-20  को मंजूरी देने का आग्रह किया। उन्होंने बताया था कि चैंपियंस लीग टी-20 भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के क्रिकेट बोर्डों का संयुक्त उपक्रम है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका की टीमों को ‘पार्टिसिपेशन फी’ दी जाएगी। इसके अलावा बीसीसीआई, सीए और सीएसए को हिस्सेदारी के अनुपात में अतिरिक्त पूंजी का हिस्सा दिया जाएगा।

बीसीसीआई के नियम ऐसा संयुक्त उपक्रम बनाने की इजाजत नहीं देते हैं। 29 अक्टूबर, 2010 को हुई आमसभा में शशांक मनोहर का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। हालांकि, CLT-20 गवर्निंग काउंसिल बना दी गई थी। तब बीसीसीआई में रहे सूत्रों के अनुसार, इस संयुक्त उपक्रम को कंपनी की शक्ल नहीं दी गई थी। तीनों बोर्डों को पहले तय अनुपात में मुनाफे में हिस्सा दिया जाना था।

एक सूत्र ने बताया, ‘बीसीसीआई ने एडिशनल पार्टिसिपेशन फी के तौर पर CA और CSA को 800 करोड़ रुपये दिए थे, जो अतिरिक्त पूंजी या मुनाफे में उनके हिस्से के बराबर थे। इसके लिए तीनों बोर्डों के बीच कोई समझौता नहीं किया गया था।’ बीसीसीआई ने 2015 में दोनों बोर्डों को 800 करोड़ रुपये दिए। यह राशि 10 साल की 97।5 करोड़ डॉलर के सौदे को बीच में ही (जुलाई, 2015) खत्म करने के एवज में स्टार इंडिया की ओर से दिए गए 30 करोड़ डॉलर के मुआवजे में हिस्से के तौर पर दी गई थी। यह लीग महज छह साल चल सकी थी।

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