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आरक्षण वरदान है या अभिशाप। भारत देश में यह मामला कई सालों से चलता आया है। लेकिन इसे लेकर संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर को दोषी ठहराना कतई उचित नहीं है। खासकर, उन लोगों को इस तरह के बेबुनियाद आरोपों-प्रत्यारोपों से बचना चाहिए जिन्हें न डॉ.अंबेडकर के बारे में पता है और न ही संविधान के बारे में और न ही देश के उन 70 सालों के बारे में जो देश जी चुका है। लेकिन क्रिकेटर हार्दिक पांड्या ऐसे ही एक मामले में फंस गए हैं। दरअसल, भारतीय क्रिकेट टीम के  खिलाड़ी हार्दिक पांड्या के खिलाफ कथित तौर पर विवादित ट्वीट करने पर एफआईआर दर्ज की गई है। बुधवार (21 मार्च) को यहां एससी/एसटी स्पेशल कोर्ट ने भीमराव आंडेबकर को लेकर ट्वीट करने पर पुलिस को पांड्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

एक विवादित ट्वीट को लेकर  पिछले दिनों हार्दिक पांड्या के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी, जिसको कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। पांड्या के खिलाफ याचिका दायर करने वाले डी.आर मेघवाल का कहना है कि पांड्या ने ट्विटर अकाउंट पर संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के खिलाफ टिप्पणी की थी। मेघवाल ने आरोप लगाया है कि पांड्या ने इस पोस्ट में न सिर्फ डॉ. भीमराव अंबेडकर को अपमानित किया, बल्कि दलित समुदाय के लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाया है।

बता दें कि पांड्या ने ट्वीट पर कमेंट किया कि ‘कौन आंबेडकर? जो एक क्रॉस लॉ (कानून) का मसौदा तैयार करते हैं। या उस रोग को फैलाते है जिसे भारत में आरक्षण कहते हैं।’ शिकायत में याचिकाकर्ता ने लिखा, ‘जनवरी में मैंने हार्दिक पांड्या के कमेंट के बारे में सुना। ये आंबेडकर जैसे व्यक्ति के लिए बहुत अपमानित था। यह नफरत फैलाने और समाज को विभाजित करने की कोशिश थी।’

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