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16 दिसंबर 1971 ही वो तारीख थी, 90,000 पाक सैनिकों ने ढाका स्टेडियम में भारतीय सेना के सामने घुटने टेके थे।  यह हमारे देश के सैनिकों की युद्ध क्षमता का ही कमाल था, जिसकी वजह से दुनिया में दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी संख्या में किसी देश के सैनिकों ने पराजय स्वीकार कर आत्मसमर्पण किया था। इससे पहले के लड़ाईयों में हमेशा किसी एक पक्ष की जीत होती थी या हार होती थी….लेकिन आधुनिक विश्व इतिहास में यह अकेला ऐसा उदाहरण है जहां भारत ने लड़ाई जीत कर एक नया देश बना डाला। एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ। हम भारतीय इस दिन को विजय दिवस के रुप में मनाते हैं। देश की राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर के इस यादगार दिन को सोल्जेराथन ने और यादगार बना दिया।

सोल्जेराथन , एक मैराथन दौड़ है जो हमारे देश के सोल्जर्स यानि सैनिकों को सम्मान देने की खातिर आयोजित होती है। इस तरह 16 दिसंबर की तारीख देश की राजधानी दिल्ली में सुबह सैनिकों को याद करने वाली दौड़ सोल्जेराथन के नाम रही।

जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से शुरु हुई इस दौड़ में शामिल होने के लिए काफी बड़ी संख्या में दिल्ली के लोग तो थे ही, देश के कोने कोने से भी काफी लोग पहुंचे थे। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के युवा उर्जा से भरपूर खेल मंत्री श्री राज्यवर्धन सिंह राठौर, जो खुद भी एक भारतीय सेना से जुड़े रहे हैं, ने इस मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौड़ में 15000 से भी अधिक धावकों व स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। नागरिकों की दौड़ने के क्षमता के अनुसार अलग अलग मानक तय थे। इस दौड़ में शामिल हुए लोगों के दिलों में सैनिकों के प्रति सम्मान तो दिखा ही, देशभक्ति का जज्बा भी दिखा।

इस मैराथन में राजनीति ,खेल, कला , साहित्य, संगीत और विधि जगत की कई मशहूर हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस सोल्जेराथन में मशहूर क्रिकेटर गौतम गंभीर, केंद्रीय मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह, भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी, कारगिल के नायक मेजर डी पी सिंह, ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त, जूनियर विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा, योगेश्वर शर्मा के अलावे अनगिनत मशहूर हस्तियां शामिल हुईं। इस सबका मानना था ऐसे आयोजन, जो भारतीयों के दिलों में देशप्रेम का जज्बा व सैनिकों के प्रति सम्मान जगाते हों आए दिन होने चाहिए। उनकी कोशिश रहेगी कि देश के गांव, कस्बों के स्तर भी सोल्जेराथन आयोजित किए जाएं। इस सोल्जेराथन का आयोजन भारतीय सेना में डॉक्टर रहे और वीएसएम पदक विजेता मेजर डॉ. सुरेंद्र पुनिया की पुरजोर कोशिशों का नतीजा है। काश सोल्जेराथन जैसी दौड़ हर रोज लगाई जाती….कम से कम हमारे देश के सैनिक जो रात दिन हमारी सीमाओं की चौकसी करते हैं उनके लिए हम भारतीय चंद मीलों की एक दौड़ तो लगा ही सकते हैं। क्योंकि किसी कवि ने ठीक ही कहा है…

हो अमर शहीदों की पूजा, हर एक राष्ट्र की परंपरा
उनसे है माँ की कोख धन्य, उनको पाकर है धन्य धरा,
गिरता है उनका रक्त जहाँ, वे ठौर तीर्थ कहलाते हैं,
वे रक्त-बीज, अपने जैसों की, नई फसल दे जाते हैं।

इसलिए राष्ट्र-कर्त्तव्य हो, शहीदों का समुचित सम्मान करे,
मस्तक देने वाले लोगों पर वह युग-युग अभिमान करे,
होता है ऐसा नहीं जहाँ, वह राष्ट्र नहीं टिक पाता है,
आजादी खण्डित हो जाती, सम्मान सभी बिक जाता है। 

 

 

  • By……….Manish Raj Singh

 

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