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जब भी किसानों के समस्या के समाधान की बात होती है तब सरकारों के पास सिर्फ कर्जमाफी का ही विकल्प रहता है। कर्जमाफी को ही किसानों के समस्या का एकमात्र उपाय माना जाता है और सरकारों को भरोसा होता है कि इससे अन्नदाता के सभी मुसीबतें कट जाएंगी। लेकिन जमीन पर वास्तविकता कुछ अलग ही होती है।

एक खबर के अनुसार कर्जमाफी के बावजूद कर्नाटक में 90 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या कर ली। यह आकड़ें बीते जुलाई महीने के हैं जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जून के आखिरी हफ्ते में  8,165 करोड़ रुपये के कर्जमाफी की घोषणा की थी। उनका दावा था कि इससे राज्य के 22 लाख किसानों पर से कर्ज का बोझ कम होगा। लेकिन इस कदम के बाद भी कर्जदार किसानों के आत्महत्या का सिलसिला नहीं रुका।

सरकारी आकड़ों के अनुसार कर्जमाफी के पहले 1 अप्रैल से 30 जून के बीच हर दिन दो किसान आत्महत्या कर रहे थे। लेकिन कर्जमाफी के बाद जुलाई में हालात और खराब हो गए जब प्रतिदिन तीन किसानों की आत्महत्या करने की रिपोर्ट आई। सबसे अधिक आत्महत्या कावेरी के आसपास के इलाकों में हुई।

उधर महाराष्ट्र में भी कुछ ऐसे ही हालात नजर आ रहे हैं और भाजपा सरकार को इस मुद्दे पर खुद के पार्टी के सांसदों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। भंडारा-गोंडिया सीट से लोकसभा सांसद नाना पटोले ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा कर्जमाफी की घोषणा के बावजूद किसानों की खुदकुशी के मामले अभी भी बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी योजना को अधिकारी ठीक ढंग से लागू नहीं कर पा रहे हैं।

आपको बता दें कि मराठवाड़ा के आठ जिलों में बीते 10 दिनों में 34 किसानों की आत्महत्या की खबर आई है।

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