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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के शहडोल लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद ज्ञान सिंह का निर्वाचन रद्द कर दिया है। हालांकि बाद में ज्ञान सिंह की अपील पर हाईकोर्ट ने फैसले पर 2 सप्ताह के लिए स्थागन दे दिया, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सके। इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी महावीर प्रसाद मांझी ने ज्ञान सिंह के निर्वाचन को चुनौती दी थी।

बता दें कि मांझी ने लोकसभा चुनाव में शहडोल संसदीय क्षेत्र से नामांकन पत्र भरा था। महावीर का कहना था कि वे मांझी जाति के हैं और निर्वाचन अधिकारी ने गलत तरीके से उसका नामांकन निरस्त कर दिया था। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस अतुल श्रीधरन की एकलपीठ ने कहा कि जाति प्रमाण-पत्र को गलत  बताते हुए निर्वाचन अधिकारी द्वारा महावीर प्रसाद का नामांकन-पत्र निरस्त किये जाने को पूरी तरह अवैधानिक करार दिया है। एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि जाति प्रमाण की जांच का अधिकार जनजाति विभाग की उच्चस्तरीय छानबीन कमेटी को है

याचिकाकर्ता मांझी की तरफ से चुनाव याचिका में वर्ष २०१६ में शहडोल लोकसभा के उपचुनाव को चुनौती दी गई थी याचिका में कहा गया था कि उन्होंने भी उपचुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था। नामांकन के साथ पेश किए गए जाति प्रमाण पत्र पर भाजपा प्रत्याशी ज्ञान सिंह ने आपत्ति जताई थी।

ज्ञान सिंह की आपत्ति पर चुनाव अधिकारी ने जाति प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए मांझी का नामांकन रद्द कर दिया था। चुनाव अधिकारी का तर्क था कि जाति प्रमाण पत्र नायाब तहसीलदार ने जारी किया है जबकि जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार एसडीएम व कलेक्टर को है। मांझी के अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने बताया कि नामांकन निरस्त किए जाने को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की ।

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