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बिहार में 24 घंटे से चल रही हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद अब जनता दल (युनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। सुबह 10 बजे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ बनने वाली उनकी इस सरकार को राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने शपथ दिलाई। इस नई सरकार में भाजपा विधानमंडल दल के नेता सुशील कुमार मोदी राज्य के नए उप मुख्यमंत्री होंगे। इसके अलावा भाजपा कोटे से लगभग दर्जन भर से अधिक विधायकों को भी सरकार में शामिल होने का मौका मिलेगा।

बता दें कि बिहार में लालूप्रसाद और उनके बेटे तेजस्वी यादव के ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद यह हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ था। जहां नीतीश ने तेजस्वी का इस्तीफा मांगा तो लालू ने कहा कि नीतीश इस्तीफा दे दें पर तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे। फिर क्या कल शाम नीतीश के इस्तीफे के बाद 20 महीने से चल रही महागठबंधन की सरकार गिर गई।

इसके तुरंत बाद जहां नीतीश कुमार को जदयू और भाजपा संयुक्त विधायक दल का नेता चुन लिया गया, वहीं नीतीश ने देर रात को ही नई सरकार बनाने का दावा पेश किया।

फिर नीतीश कुमार ने रात को ही राज्यपाल से मिलकर भाजपा, जद (यू), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, लोक जन शक्ति पार्टी के विधानसभा सदस्यों के अतिरिक्त दो निर्दलीय विधानसभा सदस्यों सहित कुल 131 विधायकों के समर्थन का पत्र प्रस्तुत किया और राज्यपाल ने नीतीश को सरकार बनाने का न्योता दिया।

राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरी हो गई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और नीतीश कुमार ने छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर लिया।

उधर देर रात से ही राजद कार्यकर्ता नीतीश के खिलाफ विरोध मार्च निकाल रहे हैं और पूरे बिहार में उनका विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है।

बता दें कि चार साल बाद जदयू और भाजपा बिहार की राजनीति में एक बार फिर से साथ आ गई है। वहीं इस साथ पर राजनेताओं के अलग अलग बयान आ रहे हैं।

बात अगर नीतीश कुमार की करें तो नीतीश का कहना है, “जैसे हालात बिहार में बन रहे थे काम करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में ये कदम उठाना जरूरी था।” उन्होंने आगे कहा कि अब बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत होगी।

तो वहीं लालू यादव ने नीतीश कुमार के फैसले के बाद उनपर पलटवार किया और कहा यह सब पहले से ही सेट था, तो उन्होंने मुझे धोखा दिया। महागठबंधन की सरकार को अगले पांच साल तक बिहार में सत्ता चलाने के लिए जनता ने चुना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उधर बीजेपी के नेता इसे नीतीश का सबसे उचित फैसला बताकर इसकी सराहना कर रहें हैं तो कांग्रेस इसकी घोर आलोचना कर रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की माने तो उन्हें भाजपा और नीतीश के बीच पक रही इस खिचड़ी का पहले से ही अंदेशा था। उन्होंने इसे अवसरवादी राजनीति करार देते हुए कहा कि “नीतीश कुमार ने सबको धोखा दिया है।”

फिलहाल नीतीश सरकार को राज्यपाल ने 29 जुलाई तक बिहार विधान सभा में अपना बहुमत सिद्ध करने को कहा है।

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