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भ्रष्टाचार को खत्म करने के मकसद से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च को मुख्यमंत्री बनते ही अपने मंत्रियों से अपनी सम्पत्ति का ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिये थे। लेकिन लगता है अफसरशाही के लिए मुख्यमंत्री के आदेशों का कोई मतलब नही है क्योंकि कई बार तय डेडलाइन समाप्त होने के बाद भी अधिकारियों ने अब तक अपने संपत्ति का ब्योरा नही दिया है।

तबादला नीति के जरिये भले ही सरकार ने सालों से एक ही मंडल और जिलें में जमे अधिकारियों पर नकेल कसने का इरादा बनाया हो लेकिन तुम डाल डाल तो मै पात –पात की कहावत को चिरतार्थ करते हुए यूपी के अधिकारी सरकार के फैसले को भी ठेंगा दिखा रहे है। सत्ता में आते ही योगी सरकार ने अपने अफसरों को अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देने को कहा था। इसे घोषित करने के लिए सरकार ने 15 दिन का मौका भी दिया था लेकिन कुछ अफसरों की मनमानी इस कदर है कि दो बार डेट बढ़ाने पर भी अभी तक उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। अब सरकार के मंत्री ये कहने से नही चूक रहे कि अफसरशाही की ये पुरानी आदत जाते जाते ही जायेगी।

Officer defying the Yogi's order, not giving details of propertyउत्तरप्रदेश नियुक्ति और कार्मिक विभाग के अनुसार अभी तक 120 आइएएस अफसरों ने अपनी चल और तीस ने अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है। इस बात से नाराज सरकार ने तीन मई तक सभी विभागों के प्रमुख सचिवों से ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा था। राज्य के 337 आईपीएस  अधिकारियों में से 262 आईपीएस  अफसरों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे दिया है। संपत्ति का ब्यौरा देने वाले अधिकारियों में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक जाविद अहमद भी शामिल हैं। वहीं बाकी बचे 75 आईपीएस अफसरों को जल्द से जल्द अपनी संपत्ति का ब्यौरा देने का निर्देश दिया गया है।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर सबसे पहले प्रदेश के पांच आईएएस अधिकारियों ने अपनी संपत्ति घोषित कर दी है। इनमे हमेशा सुर्खियों में रहने वाली आईएएस अधिकारी बी. चंद्रकला और ग्रेटर नोएडा के खनन मामले से चर्चाओं में आईं दुर्गाशक्ति नागपाल ने भी अपनी संपत्ति सार्वजनिक कर दी है।

जानें किसके पास कितनी संपत्ति-

नागपाल के पास करोड़ों रूपये की प्रापर्टी है। दुर्गाशक्ति नागपाल के पास 5.70 करोड़ रूपये की प्रॉपर्टी है। कर्नाटक के गुलबर्ग में पैतृक जमीन है। लखनऊ और बैंगलुरू में भी उनके पास प्रॉपर्टी  है। उनके पति अभिषेक सिंह के पास नोएडा में 35 लाख रूपये का फ्लैट दिखाया गया है। जौनपुर में 37.50 लाख रूपये की जमीन है।

2008 बैच की महिला आईएएस अफसर और मेरठ की डीएम रह चुकी बी. चंद्रकला ने 2.38 करोड़ की संपत्ति दिखाई है। आंध्र प्रदेश के अन्नपूर्णानगर में 45 लाख की आवासीय संपत्ति है, जिससे उनकी वार्षिक 3.25 लाख रुपए आमदनी होती है। अचल संपत्ति में एक 48 लाख रूपये कीमत वाला फ्लैट है जो उन्होंने अपनी बेटी कीर्ति चंद्रा के नाम पर खरीदा था। इसे साल 2012 में लखनऊ के सरोजनी नायडू मार्ग पर खरीदा गया था। इससे वार्षिक 6.50 लाख रुपए आमदनी है।

2008 बैच की आईएएस किंजल सिंह के पास 2.15 करोड़ रूपये की प्रॉपर्टी है। उन्होंने लखनऊ, मध्यप्रदेश, चित्तौड़गढ़, गोरखपुर, बलिया, प्रतापगढ़ में प्रॉपर्टी  दिखाई है। ज्यादातर में उनकी बहन उनके साथ हिस्सेदार हैं। बैंक लोन से एक 70 लाख रूपये का मकान भी बताया गया है।

2010 बैच की नेहा शर्मा ने 2.65 करोड़ रूपये की संपत्ति दिखाई है। छत्तीसगढ़ में एक करोड़ रूपये का मकान है। गाजियाबाद में सवा करोड़ का एक मकान है। 40 लाख रूपये की ज्वैलरी भी दिखाई गई है।

2004 बैच के राजशेखर के पास 4 करोड़ की प्रॉपर्टी है। इसमें लखनऊ में सवा करोड़ रूपये का फ्लैट, बैंगलुरू में 1.9 करोड़ का फ्लैट शामिल है।

अचल संपत्ति का ब्यौरा तो अफसर हर साल जमा करते हैं। पहली बार उन्हें अपनी चल संपत्ति बताने को कहा गया था। मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने 20 अप्रैल को दोबारा एक पत्र के जरिये निर्देश जारी करते हुए चल संपत्ति का विवरण उपलब्ध न कराने वाले आइएएस अफसरों से नाराजगी जताई थी। उन्होंने 25 अप्रैल से पहले हर हाल में चल संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने को कहा था। इसके बाद भी ब्यौरा नहीं मिला। आखिरी मौका देते हुए मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने तीन मई को प्रमुख सचिवों की बैठक बुलाने की योजना बनायी थी। इस बैठक में इस बात पर चर्चा हुई की जिन अधिकारियों ने बार-बार मौका देने पर भी अपना ब्यौरा नहीं दिया उनका क्या किया जाये। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है । लेकिन इतना तो साफ हो गया अफसरशाही पर लगाम लगाना यूपी की नयी योगी सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है ।

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