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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और समाजवादी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मुश्किल बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आज सीबीआई से ब्योरा मांगा है कि इनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच की स्थिति क्या है।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने सीबीआई को इस मामले में जांच की स्थिति बताने के संबंध में दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा। अदालत में यह याचिका कांग्रेस नेता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने दायर की है। उनकी मांग है कि सीबीआई को मुलायम, अखिलेश और प्रतीक यादव की संपत्तियों की जांच की रिपोर्ट अदालत में रखने का निर्देश दिया जाए।

आज सुनवाई के दौरान मुलायम के वकील ने कोर्ट से कहा कि ये मामला इस समय राजनीतिक कारणों से उठाया गया है। लेकिन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि चुनाव की वजह से इस मामले को लटकाया नहीं जा सकता है। हम तो सिर्फ ये जानना चाहते हैं कि क्या सीबीआई ने कोई प्राथमिकी दर्ज की है और अगर की है तो उसकी जांच की स्थिति क्या है।

2007 में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि प्रथम दृष्टि मुलायम सिंह यादव उनके बेट अखिलेश यादव और प्रतीक यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला बनता है। उस वक़्त कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि वह इस मामले में कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। तीनों ने कोर्ट के आदेश को पुनर्विचार याचिका के जरिए चुनौती दी थी जिसे 2012 में खारिज कर दिया गया था।

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