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“आस्तीन के सांप”…ये कहावत तो आपने खूब सुनी होगी लेकिन इसे चरित्रार्थ होते भी कभी आपने देखा है…? अगर नहीं, तो हम आपको बताते हैं इस कहावत के मायने क्या हैं…? दरअसल, हिंदुस्तान की सियासत का ये हमेशा से मिजाज रहा है कि सियासत का मूल, लोगों की समस्याओं का समूल नाश में है।

लेकिन बदलते दौर की इस राजनीति के अंदाज, कुछ इस कदर बदल चुके हैं कि, राजनैतिक रोटियां सेंकने के चक्कर में नेता इतना बेकाबू हो जाते हैं कि उन्हें, ना तो अपने मान-सम्मान की चिंता रह जाती है और ना ही देश के अभिमान-स्वाभिमान की…पिछले कुछ वर्षों से नेताओं के ऐसे बयान सामने आ रहे हैं।

जिनको देशद्रोह की श्रेणी में रखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता…अपनी डर्टी-पॉलिटिक्स को साधने के लिए माननीय इस तरह बेकाबू हो जाते हैं कि उन्हें ये तक याद नहीं रह जाता…या फिर कहें, जानबूझकर भूल जाते हैं…कि उनका एक स्वार्थ पूर्ण बयान देश की बर्दाश्त करने की सीमाओं को लांघ रहा है।

आज हम बात कर रहे हैं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अकबर लोन की, जो कुपवाड़ा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ऐसी हिमाकत कर बैठे, जिसे कोई भी स्वाभिमानी हिंदुस्तानी, कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता. अकबर लोन पाकिस्तान के प्रति अपने अगाध प्रेम को अपने भाषण में छिपा नहीं पाए।

उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगर कोई पाकिस्तान को एक गाली देगा, तो मैं उसे 10 गालियां देने को तैयार हूं…अब कौन समझाए लोन साहब को, कि हिंदुस्तान में कहावतों की कमी नहीं है, एक और कहावत है जिसमें कहा गया है कि “जिस थाली में खाओ…उस थाली में छेद तो ना करो” और कहावतें कहने वाले लोगों ने शायद इस बात का अंदाजा पहले ही लगा लिया होगा कि भविष्य में हिंदुस्तान में रहने वाले अकबर लोन जैसे नेताओं की अच्छी-खासी तादाद होगी, जो खाएगी देश का…लेकिन गाएगी, दुश्मन देश का…! …हालांकि सिर्फ लोन साहब को ही दोष देना मुनासिब नहीं होगा, जिनकी पार्ती के मुखिया ही देश विरोधी भाषा का इस्तेमाल करते हों, उनकी पार्टी के नेताओं से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है…!

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