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प्रदेश में भाजपा की सरकार बनते ही रामनगरी में पत्थरों की खेप का आगमन भी शुरू हो चुका है और विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) राम मंदिर निर्माण की मुहिम को धार देने की तैयारी में जुट गया है। मंदिर निर्माण के लिए रामनगरी अयोध्या में राजस्थान के भरतपुर के वंशी पहाड़ से पत्थरों की खेप का आगमन फिर से शुरू हो चुका है। सोमवार को रामसेवकपुरम् की कार्यशाला में पहुंचे दो ट्रक पत्थरों की खेप ने राम मंदिर निर्माण मामले को लेकर हलचल मचा दी। इन दो ट्रकों में कुल 130 टन लाल पत्थर सोमवार की सुबह लगभग 6.15 बजे अयोध्या लाया गया। इसी के साथ रामसेवकपुरम की सात वर्षों से बंद कार्यशाला को दोबारा शुरू करने की तैयारी भी कर ली गई है। इसकी पुष्टि विहिप के संगठन मंत्री त्रिलोकी नाथ पाण्डेय ने की। उन्होंने बताया कि पत्थरों की तराशी के लिए लगाई गई बड़ी-बड़ी कटर मशीनों को ठीक कराया जा रहा है।

साल 2015 के बाद से पहली बार पत्थरों की यह खेप यहां पहुची है, उस समय अखिलेश सरकार ने फॉर्म 39 पर रोक लगाकर पत्थर मंगाये जाने पर रोक लगा दी थी। पर योगी सरकार बनने के बाद वाणिज्य कर विभाग ने फिर से फॉर्म 39 जारी कर दिया। 19 जून को विहिप ने विधिक रूप से प्रावधान को पूरा करते हुए राजस्थान से दो ट्रक पत्थरों की खेप तराशी के लिए मंगवा लिया है।

विहिप प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि सपा सरकार ने पत्थर तराशी के लिए  पत्थर पर रोक लगाने का काम किया था, जिसे योगी सरकार ने शुरू करवा दिया है। मंदिर निर्माण में बाधक बने पूर्व सीएम अखिलेश यादव को राममन्दिर निर्माण में बाधा पहुचाने का फल मिला है, जिससे वह दुबारा सत्ता में नही आ सके। उन्होंने कहा कि 30 अक्टूबर 1990 को राम भक्तों पर गोली चलवाने वाले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी सत्ता से बाहर हो गए थे। यह माना जा रहा है कि जल्द ही राम मंदिर को लेकर सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

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