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राजधानी दिल्ली ही नहीं उत्तर प्रदेश के भी कई जिले भी स्मॉग की परेशानी से जूझ रहे हैं। आज एनजीटी की दिल्ली सरकार को लगी फटकार के बाद यूपी सरकार ने भी सीख लेते हुए कड़े फैसले लिए हैं। बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए यूपी परिवहन विभाग ने एनसीआर समेत आठ जिलों में जहरीला धुंआ छोड़ रहे चार लाख डीजल और पेट्रोल वाहनों को सीज करने का आदेश जारी कर दिया है।

बता दें कि इस फैसले के बाद गाजियाबाद, हापुड़, अलीगढ़, मुजफ्फरनगर, मथुरा, मेरठ में अधिकारियों ने जबरदस्त चैकिंग अभियान चला रखा है। वाहनों को सीज करके पुलिस लाइन में रखा जा रहा है। नई व्यवस्था के मुताबिक 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 साल पुराने डीजल के वाहनों को चेकिंग के बाद सीज किया जा रहा है।

इसके तहत मुजफ्फरनगर मे अब तक 6 पेट्रोल वाहनों को सीज किया गया है और 55 वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए। वहीं 10 साल पुराने 198 डीजल वाहनों के चालान किए गए और 95 डीजल वाहनों को सीज किया गया जबकि 958 डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए। 1147 वाहनों को एनसीआर से बाहर भेजने के लिए दी गई एनओसी को भी रद्द कर दिया गया है।

इसके अलावा सभी हॉट मिक्स प्लांट को भी बंद करने का आदेश दिया गया है। खनन व सड़क निर्माण पर भी रोक लगा दी गई है। अब प्रदेश में भवन निर्माण सामग्री के परिवहन पर भी रोक है। सड़कों पर नियमित सफाई और जल छिड़काव का आदेश दिया गया है। जिससे तापमान में नमी बरकरार बनी रहे

योगी सरकार के इस फरमान के बाद संबंधित जिलों के आरटीओ और एआरटीओ को दिए गए इस आदेश के बाद कार मालिकों में खलबली मच गई है। वहीं इस फैसले पर परिवहन विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद हालात में थोड़ा बहुत सुधर आ सकता है।

उल्लेखनीय है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ही कहा था कि यह धुंध पर्यावरण के नष्ट होने का नतीजा है। योगी ने कहा कि जंगलों की अवैध कटान और लगातार हो रहे अवैध खनन से पर्यावरण को गम्भीर खतरा पैदा हो गया है। अगर इसे मिलकर रोकने का प्रयास न किया गया तो पूरे मानव जीवन को खतरा पैदा हो जाएगा।

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